प्रदूषण के खिलाफ WWF-इंडिया की पहल, सुरक्षित और 'ग्रीन दिवाली' मनाने के लिए 130 शहरों में अवेयरनेस कैंपेन शुरू
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक देशव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करना है।
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WWF-इंडिया ने लॉन्च किया देशव्यापी 'ग्रीन दिवाली' अभियान (AI-Generated image)
HighLights
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया।
पटाखों से वायु प्रदूषण कम करने का लक्ष्य।
दिल्ली सहित 130 शहरों पर विशेष ध्यान।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण बढ़ने की आशंका के बीच पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-इंडिया ने देशव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया है।
20 अक्टूबर से आठ नवंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत लोगों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक संगठनों से पटाखे नहीं जलाने तथा स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल दिवाली मनाने की अपील की गई है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शामिल 130 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डब्ल्यू डब्ल्यूएफ-इंडिया का अभियान
डब्ल्यू डब्ल्यूएफ-इंडिया के पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के साथ स्वच्छ हवा के लिए सामूहिक भागीदारी बढ़ाना है।
इसके तहत स्कूलों की प्रार्थना सभाओं, कक्षाओं, जागरूकता रैलियों और सामुदायिक बैठकों में लोगों को पटाखामुक्त दिवाली मनाने की शपथ दिलाने का आह्वान किया गया है।
पटाखों का प्रदूषण कई दिनों तक हवा में रह सकता है
अभियान के अनुसार, पटाखों से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और जहरीली धातुओं के यौगिक निकलते हैं। दिवाली के आसपास सर्दी की शुरुआत, कम तापमान और शांत हवाओं के कारण प्रदूषक जमीन के करीब जमा रह सकते हैं।
इससे हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है और बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा अस्थमा और हृदय व फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष परेशानी हो सकती है। पटाखों से आग लगने, जलने और पशु-पक्षियों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
स्वच्छ हवा के प्रयासों को आगे बढ़ाने की अपील
डब्ल्यू डब्ल्यूएफ-इंडिया के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में 130 में से 108 शहरों में 2017-18 की तुलना में वार्षिक पीएम 10 के स्तर में कमी दर्ज की गई। इनमें 72 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी रही।
वहीं, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले शहरों की संख्या 2017-18 के छह से बढ़कर 2025-26 में 14 हो गई।
सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने की अपील
अभियान में लोगों से मिट्टी के दीये और ऊर्जा-कुशल रोशनी अपनाने, प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाने, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने, कचरे को अलग-अलग करने और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
साथ ही लोगों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप पर दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) देखने और प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी गई है।
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