संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली

आहिस्ता-आहिस्ता आर्थिक गतिविधियां तो पटरी पर लौटने ही लगी हैं। इसके साथ ही सिर पर गठरी रखे घरों जो जाने वाले लोगों का झुंड भी अब सड़क से गायब हो गया है। यही नहीं स्क्रीनिंग सेंटर से लेकर रेलवे स्टेशन तक अब कामगारों में गृह राज्य जाने को लेकर जो आपाधापी भी वह भी अब सुकून भरे सफर में तब्दील हो चुकी है। आलम यह है कि शुक्रवार को महज तीन श्रमिक ट्रेनें ही यात्रियों के लिए रवाना की गई।

कोरोना महामारी के बीच अपने भविष्य को लेकर चितित लोग परिवार तक पहुंचने के लिए किसी भी तरह का जोखिम उठाने को तैयार थे। जेठ की गर्मी में भी कई लोग पैदल सैकड़ों मील का सफर करने को निकल पड़े थे। इन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। दिल्ली से पहली ट्रेन आठ मई को रवाना हुई थी। दिल्ली सरकार के अनुसार इन ट्रेनों से घर जाने के लिए चार लाख के करीब लोगों ने आवेदन किया है। इसमें ढाई लाख के करीब लोग लौट चुके हैं। घर जाने वाले स्वास्थ्य जांच कराने के लिए घंटों स्क्रीनिग सेंटर पर इंतजार करते थे। धूप में लंबी लाइन लगी रहती थी। अब यह स्थिति नहीं है। ऐसा नहीं है कि कामगार अब वापस नहीं लौट रहे हैं। लोग घर तो जा रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या कम हो गई है। अब पहले जैसी आपाधापी नहीं दिखती है।

इन्हें घर पहुंचाने के लिए ट्रेनों की मांग भी अब कम हो गई है। दिल्ली मंडल से रोजाना 25 के करीब ट्रेनें रवाना होती थीं, जिसमें से अधिकांश दिल्ली-एनसीआर के स्टेशनों से चलती थीं। दिल्ली के स्टेशनों से भी रोजाना 20 के करीब ट्रेनें रवाना होती थीं, लेकिन पिछले दो दिनों से मात्र तीन-तीन ट्रेनें चलाई जा रही हैं। 27 मई को भी पांच ट्रेन रवाना हुई थी।

दिल्ली सरकार के अनुसार 25 मई तक 196 श्रमिक विशेष ट्रेनों से 2.41 लाख लोगों को घर भेजा गया था। उसके बाद चार दिनों में दिल्ली से 30 ट्रेनों से लगभग 45 हजार कामगारों को रवाना किया गया है। वहीं, दिल्ली मंडल के अलग-अलग स्टेशनों से अब तक 315 ट्रेनों से 4.51 लाख लोगों को उनके घर पहुंचाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि एक जून से एक सौ जोड़ी विशेष ट्रेनें भी चलेंगी, जिसमें यात्री पहले की तरह 120 दिन बाद सफर करने के लिए भी टिकट बुक करा सकते हैं।

Posted By: Jagran

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