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17 E-FIR के जरिये फंसाने पर साकेत कोर्ट का कड़ा रुख, दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार; कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट

Published: Thu, 09 Jul 2026 10:52 AM (IST)

दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को 17 ई-एफआईआर में एक व्यक्ति को झूठा आरोपी दिखाने पर फटकार लगाई है, जबकि वह उन मामलों में कभी गिरफ्तार नहीं हुआ था।

साकेत कोर्ट ने  दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार। फोटो: सांकेतिक

साकेत कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. दिल्ली कोर्ट ने पुलिस को 17 ई-एफआईआर पर फटकारा

  2. झूठा फंसाने पर जमानत मिली, रिकॉर्ड सुधारने का आदेश

  3. पुलिस कमिश्नर को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है।

अदालत ने पाया कि एक व्यक्ति को 17 ई-एफआईआर में गलत तरीके से आरोपी दिखाया गया, जबकि उन मामलों में न तो उसकी कभी गिरफ्तारी हुई थी और न ही किसी चार्जशीट में उसका नाम था। अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए पुलिस आयुक्त को रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने शुरुआत में दावा किया था कि आरोपी अजय राठी 36 आपराधिक मामलों में शामिल है। बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई तो अदालत ने सत्यापित रिपोर्ट मांगी।

जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

जांच अधिकारी द्वारा बाद में दाखिल रिपोर्टों में पता चला कि आरोपी के खिलाफ दर्ज 17 ई-एफआईआर का कोई रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है।

अदालत ने कहा कि किसी एफआईआर में केवल नाम दर्ज होने या रिकॉर्ड में शामिल कर देने से किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी गिरफ्तारी या विधिक कार्रवाई न हुई हो।

अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी की गलत आपराधिक हिस्ट्री उसके जमानत आवेदन पर प्रतिकूल असर डाल सकती थी। संशोधित रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी केवल पांच मामलों में शामिल पाया गया, जिनमें वर्तमान एफआईआर भी शामिल है। इनमें से तीन मामलों का निस्तारण पहले ही हो चुका है।

पारिवारिक विवाद को आपराधिक मामला बनाने का आरोप

यह मामला आरोपी और उसकी मां के बीच पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि संपत्ति के अधिकार से वंचित करने के उद्देश्य से घरेलू विवाद को आपराधिक रंग दिया गया। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज होने से पहले आरोपी की पत्नी ने धमकियों को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई थी।

सह-आरोपियों को पहले ही मिल चुकी राहत

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले के दो सह-आरोपियों को नियमित जमानत मिल चुकी है, जबकि दो अन्य को अग्रिम जमानत दी जा चुकी है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि एफआईआर में नामजद दो व्यक्ति घटना वाले दिन जम्मू-कश्मीर और गोवा में मौजूद थे। इस आधार पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता का घटनाक्रम पूरी तरह भरोसेमंद नहीं प्रतीत होता।

पुलिस आयुक्त को दिए सुधार के निर्देश

आरोपी के गलत आपराधिक रिकॉर्ड पर चिंता जताते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस आरोपी के गलत या भ्रामक आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा करे और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए।

साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि पुलिस आयुक्त कार्यालय से आदेश प्राप्त होने की पुष्टि (Acknowledgement) 13 जुलाई तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

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