असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में यमुना को स्वच्छ बनाने का प्रस्तुत किया मॉडल, गठित होगी टास्क फोर्स
असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में पर्यावरण मंत्रालय ने आर्द्रभूमि दिवस मनाया। कार्यक्रम में छात्रों की कलाकृतियां और विभिन्न विभागों के ...और पढ़ें
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असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में सोमवार को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) दिवस मनाया गया।
HighLights
असोला भाटी में पर्यावरण मंत्रालय ने मनाया आर्द्रभूमि दिवस।
गंगा टास्क फोर्स ने यमुना सफाई का मॉडल प्रस्तुत किया।
पर्यावरण मंत्रियों ने आर्द्रभूमि के महत्व पर प्रकाश डाला।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में सोमवार को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) दिवस मनाया गया। आर्द्रभूमि के महत्व पर आधारित विभिन्न स्कूलों के छात्रों की चयनित चित्रों को जहां प्रदर्शित किया गया, वहीं अलग-अलग विभागों की ओर से स्टाल लगाकर आर्द्रभूमि को समृद्ध करने व जैव-विविधता बढ़ाने पर हो रहे कार्यों को दर्शाया गया।
39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर की गंगा टास्क फोर्स की ओर से यमुना को स्वच्छ बनाने का माडल प्रस्तुत किया गया। 39जीटीसी की ओर से वर्तमान में यमुना किनारे रहने वालों को जागरूक किया जा रहा है। बतौर मुख्य अतिथि पर्यावरण राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने सभी का अवलोकन कर पर्यावरण को लेकर हो रहे कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरणविदों ने आर्द्रभूमि के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र का एक अत्यंत उत्पादक और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह पानी को शुद्ध करने, बाढ़ और तूफानों को नियंत्रित करने, भूजल पुनर्भरण में मदद करने के साथ ही कार्बन को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रतिवर्ष दो फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1981 में देश में केवल दो आर्द्रभूमि चिल्का झील (ओडिशा) व केवलादेव नेशनल पार्क (राजस्थान) थे। लोगों की सजगता और सरकार के प्रयासों से इनकी संख्या तेजी से बढ़ी। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में आर्द्रभूमि की संख्या 98 हो चुकी है। इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित रहे।
