संसदीय समिति ने 5 साल पहले बताया था असुरक्षित, फिर भी वीएमएमसी-सफदरजंग के ओल्ड ब्वाॅयज हाॅस्टल में रह रहे छात्र
सत्य निकेतन हादसे के बाद वीएमएमसी व सफदरजंग अस्पताल के हाॅस्टलों की दयनीय स्थिति पर विरोध मुखर हुआ है। संसदीय ...और पढ़ें

वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) व सफदरजंग अस्पताल हॉस्टल जर्जर अवस्था में। जागरण
HighLights
संसदीय समिति ने 2021 में हॉस्टल को असुरक्षित बताया था।
वीएमएमसी-सफदरजंग के ओल्ड ब्वॉयज हॉस्टल में अब भी छात्र रह रहे हैं।
पूर्व छात्र ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) व सफदरजंग अस्पताल के हाॅस्टलों की दयनीय स्थिति को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समिति ने वर्ष 2021 में अपनी 126वीं रिपोर्ट में वीएमएमसी के ओल्ड ब्वाॅयज हाॅस्टल को पुरानी इमारत के कारण छात्रों के रहने के लिए सुरक्षित नहीं बताया था।
जल्द नया हाॅस्टल बनवाने की मांग की
बावजूद इसके उसे अब भी एमबीबीएस छात्रों के रहने के लिए आवंटित किया जा रहा है। सफदरजंग स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व हास्टल सचिव डाॅ. मनीष जांगड़ा ने इसे मेडिकल छात्रों के लिए जान का खतरा बताते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर मेडिकल छात्रों के रहने की अलग व्यवस्था कराने और जल्द नया हाॅस्टल बनवाने की मांग की है।
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182 कमरे, 208 छात्रों की क्षमता
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार ओल्ड ब्वायज हास्टल में 182 कमरे थे और 208 छात्रों के रहने की क्षमता थी। रिपोर्ट में भवन पुराना होने के कारण इसे छात्रों के रहने के लिए सुरक्षित नहीं बताया गया था। पांच वर्ष से अधिक समय बाद सवाल है कि इस अवधि में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की दोबारा जांच कब और किस एजेंसी ने की, यदि इसे सुरक्षित घोषित किया गया तो किस आधार और किस फिटनेस प्रमाणपत्र के आधार पर छात्रों को वहां रहने की अनुमति दी गई।
रहने के लिए असुरक्षित तो मेस कैसे सुरक्षित?
वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) व सफदरजंग अस्पताल परिसर में पीजी हाॅस्टल भवन को छात्रों के रहने के लिए असुरक्षित बताते हुए कमरों का आवंटन नहीं किया जा रहा है पर, उसी भवन के भूतल में मेडिकल छात्रों, डाॅक्टरों के लिए मेस-कैंटीन चलाई जा रही है।
उनकी क्षमता एक समय में करीब 100 लोगों के बैठने और खाने की है। ऐसे में प्रश्न यह है कि जिस भवन में रहना सुरक्षित नहीं है, वहां छात्रों और कर्मचारियों के भोजन करने की व्यवस्था कैसे सुरक्षित है। किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?

जल्द सुरक्षित नया आवास उपलब्ध कराएं
इन्हीं सब मुद्दों को लेकर सफदरजंग अस्पताल के पूर्व एमबीबीएस छात्र और सफदरजंग स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व हास्टल सचिव डाॅ. मनीष जांगड़ा ने आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि ओल्ड ब्वाॅयज हाॅस्टल असुरक्षित है, इसलिए छात्रों को जल्द सुरक्षित नया आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी इस हाॅस्टल में रह चुके हैं।

उन्होंने पीजी हाॅस्टल की मेस-कैंटीन को भी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की। यही नहीं वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) व सफदरजंग अस्पताल के हास्टल की सुरक्षा को लेकर चिकित्सकों के विभिन्न संगठन भी विरोध जता रहे हैं।
