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विहिप का मौलाना मदनी पर पलटवार, भारत की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाना देश को ब्लैकमेल करने जैसा

Published: Thu, 24 Sep 2026 09:38 AM (IST)

मौलाना महमूद मदनी के भारतीय न्यायप्रणाली, प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्था पर उठाए गए सवालों पर विहिप ने तीखा पलटवार किया है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी।

HighLights

  1. मौलाना मदनी के न्यायप्रणाली पर सवालों पर विहिप का तीखा पलटवार।

  2. विहिप ने इसे भारत की संप्रभुता पर सीधा प्रहार बताया।

  3. कहा, देश का कानून पसंद नहीं तो कहीं और ठिकाना ढूंढें।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी द्वारा देश की न्यायप्रणाली, प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्था पर उठाए गए सवालों पर विहिप ने तीखा पलटवार किया है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मदनी के बयान को भारत की संप्रभुता पर विदेशी शक्तियों के साथ मिलकर किया जाने वाला सीधा प्रहार करार दिया है।

देश को ब्लैकमेल करने की कोशिश

विनोद बंसल ने कहा कि देश की राजधानी में बैठकर भारतीय न्यायपालिका, कार्यपालिका और संविधान पर अविश्वास जताना और अंतरराष्ट्रीय मंचों व संयुक्त राष्ट्र में शिकायत करने की बात कहना सीधे तौर पर देश को ब्लैकमेल करने की कोशिश है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कट्टरपंथी धड़े का भारत के लोकतंत्र, सरकार और देश की शीर्ष अदालत पर से भरोसा उठ चुका है, वह इस देश की व्यवस्था में रहकर ऐसी अलगाववादी भाषा क्यों बोल रहा है?

जिद के कारण विभाजित हुआ

विहिप प्रवक्ता ने कहा कि 1947 में भारत का एक बड़ा भू-भाग इसी तरह की कट्टरपंथी मानसिकता और जिद के कारण विभाजित हुआ था। आज भी ऐसे तत्व भारत माता की जय और वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध करते हैं और दूसरी ओर न्यायालयों में जाकर असामाजिक व कट्टरपंथी तत्वों का बचाव करते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई का बचाव करते हुए विहिप ने स्पष्ट किया कि देश में किसी भी वैध धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया है। कानून के दायरे में रहकर केवल उन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई है, जो कानून को ठेंगा दिखाकर बनाए गए थे। ऐसे अवैध निर्माणों को धर्म स्थल का नाम देकर बचाना कानून व्यवस्था का अपमान है।

गीदड़भभकी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

बंसल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भारत अब बदल चुका है और किसी भी भड़काऊ सोच या गीदड़भभकी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी को भारत का संविधान, कानून और न्याय व्यवस्था पसंद नहीं है, तो वह अपनी मानसिकता के अनुकूल स्थान चुनने के लिए स्वतंत्र है।

विहिप ने मुस्लिम समाज से भी अपील की कि वे ऐसे भड़काऊ बयानों से दूरी बनाएं और देश की मुख्यधारा व कानून के शासन में विश्वास रखें, क्योंकि ऐसे बयान केवल समाज में वैमनस्य फैलाने का काम करते हैं।