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Exclusive: 2028 तक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनेगा PM मोदी का पैतृक गांव 'वडनगर', 2700 साल पुराना इतिहास

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:16 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि वडनगर को 2028 तक यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी है। यह ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी। AI जनरेटेड इमेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी। AI जनरेटेड इमेज

HighLights

  1. वडनगर को 2028 तक यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल करने का लक्ष्य।

  2. 2700 साल से लगातार आबाद यह शहर प्राचीन इतिहास का प्रतीक।

  3. पुरातात्विक खोदाई में बौद्ध विहार, स्तूप, किलेबंदी के अवशेष मिले।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी है। करीब 2700 साल से लगातार आबाद इस ऐतिहासिक शहर को वर्ष 2028 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भारत प्रयास करेगा।

गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित वडनगर की पहचान केवल प्रधानमंत्री की जन्मभूमि के साथ साथ प्राचीन भारतीय इतिहास, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर भी रही है।

शहर की ऐतिहासिक पहचान में इसकी शिक्षा और विद्वत्ता की परंपरा का भी विशेष योगदान रहा है। प्राचीन समय में यहां के विद्वानों की राजदरबारों में प्रशासक और सलाहकार के रूप में काफी मांग रहती थी।

वडनगर देश के उन विरले ऐतिहासिक शहरों में शामिल है, जहां हजारों वर्षों से लगातार बसावट के प्रमाण मिले हैं। यहां हुई पुरातात्विक खोदाई में बौद्ध विहार, स्तूप, प्राचीन किलेबंदी, आवासीय परिसर और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े अवशेष सामने आए हैं। ये अवशेष इस शहर के लंबे इतिहास और अलग-अलग कालखंडों में विकसित हुई सभ्यता की कहानी बयां करते हैं।

व्यापार और संस्कृति का प्रमुख केंद्र

प्राचीन व्यापार मार्गों के चौराहे पर स्थित होने के कारण वडनगर कारोबार, शिल्प और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। यहां से अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के संपर्क और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

प्राचीन जल प्रबंधन भी विरासत का हिस्सा

वडनगर की विरासत केवल पुरातात्विक अवशेषों तक सीमित नहीं है। यहां की प्राचीन जल प्रबंधन व्यवस्था, ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, मंदिर और प्रसिद्ध कीर्ति तोरण भी इसके गौरवशाली अतीत की पहचान हैं। ये स्थापत्य अवशेष उस समय की निर्माण कला और नगर व्यवस्था की झलक पेश करते हैं।

वडनगर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास सफल होता है तो इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी। साथ ही भारतीय सभ्यता की प्राचीनता, सांस्कृतिक विविधता और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा।

इस शहर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल कराने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने 13 दिसंबर 2022 को प्रस्ताव भेजा था। एएसआइ के महानिदेशक डॉ. वाइ एस रावत ने इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि अगले साल 2027 के अंत से लेकर 2028 में इस प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी किए जाने पर काम होगा। इस प्रस्ताव का काफी किया जा चुका है।