कचरे से संसाधन... इस्तेमाल किया पानी 2047 तक बनेगा 3 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, CEEW का दावा
सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 'इस्तेमाल किया गया पानी' कचरा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। इसका पुन: उपयोग 2047 ...और पढ़ें
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सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 'इस्तेमाल किया गया पानी' कचरा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। इमेज एआई जेनरेटेड

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संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। जहां एक ओर बढ़ती गर्मी व पानी की घटती उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं थिंक टैंक काउंसिल आन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के ताजा शोध ने बहुत उम्मीद भरी तस्वीर पेश की है।
शोध के अनुसार, यदि हम ''इस्तेमाल किए गए पानी'' (यूज्ड वाटर) को कचरा समझने के बजाय एक संसाधन मान लें, तो यह न केवल हमारी प्यास बुझाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान भी दे सकता है।
'फाइनांसिंग फार ट्रीटेड यूज्ड वाटर रियूज इन इंडिया' नामक यह रिपोर्ट साफ करती है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती बड़ी है, लेकिन भारत ''हीट-रेजिलिएंट'' योजनाओं और आधुनिक जल उपचार तकनीकों के साथ न केवल सुरक्षित हो रहा है, बल्कि एक ''ग्रीन इकोनामी'' की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है।
संकट में छिपे हैं समृद्धि के अवसर
सीईईडब्ल्यू के विशेषज्ञों डा विश्वास चितले, नितिन बस्सी और दिशा अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि गर्मी और पानी का गहरा संबंध है। जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, पानी की मांग बढ़ती है। लेकिन इसी चक्र में समाधान छिपा है।
बड़ा बाजार : भारत की ''ट्रीटिड यूज्ड वाटर'' (उपचारित प्रयुक्त जल) अर्थव्यवस्था 2047 तक 3.04 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है।
रोजगार की बौछार : इस क्षेत्र में सही निवेश और तकनीक से साल 2047 तक एक लाख से अधिक नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
- राजस्व का नया स्रोत : सूरत जैसे शहरों ने पहले ही दिखा दिया है कि उद्योगों को उपचारित पानी बेचकर करोड़ों रुपये (2014-21 के बीच 230 करोड़ ) का राजस्व कमाया जा सकता है।
भविष्य की तैयारी : ''वाटर रियूज सर्टिफिकेट''
जिस तरह सोलर एनर्जी के लिए सर्टिफिकेट होते हैं, वैसे ही अब ''वाटर रियूज सर्टिफिकेट'' का सुझाव दिया गया है। इससे पानी बचाने वाली कंपनियां और शहर अपने क्रेडिट बेच सकेंगे, जिससे जल संरक्षण एक मुनाफे का सौदा बन जाएगा। यह एक बाजार-आधारित तंत्र है, जो अपने पुनरुपयोग लक्ष्यों से अधिक काम करने वाले बड़े यूजर्स को उन लोगों के साथ क्रेडिट व्यापार करने की सुविधा देता है, जो लक्ष्य से पीछे रह जाते हैं। इससे दक्षता को मौद्रिक लाभ से जोड़ा जा सकेगा और नियमों का अनुपालन बढ़ेगा।
नितिन बस्सी ने आगे कहा, “उपचारित प्रयुक्त जल के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना भारत के शहरों को जल के मामले में सुरक्षित बनाने के सबसे व्यावहारिक तरीकों में से एक है। शहरी स्थानीय निकायों को दीर्घकालिक नगर योजनाएं बनाकर, वित्तपोषण में विविधता लाकर और उचित लागत आधारित शुल्क तय करके भारत को उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल की तरफ ले जाना चाहिए।
प्लांट संचालन में अपेक्षित एक लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के अलावा, दोबारा इस्तेमाल बढ़ने से निर्माण और प्रौद्योगिकी सेवाओं में भी रोजगार पैदा होगा, नगर पालिकाओं के लिए एक टिकाऊ राजस्व उत्पन्न होगा, हरित निवेश आकर्षित आएगा और नदियों में प्रदूषण कम होगा। सही योजना, मूल्य निर्धारण और व्यावसायिक माडल के साथ, इस्तेमाल हो चुका जल भी एक वित्तीय रूप से सतत और पर्यावरणीय रूप से उपयोगी शहरी संसाधन बन सकता है।”
