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नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त लोकपाल की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए जिस बिल को मंजूरी दी है, उसके लागू होने के बाद यहां भ्रष्टाचार की किसी भी शिकायत पर एक साल के अंदर दोषी जेल के अंदर होगा।

इसमें छह महीने के अंदर जांच पूरी करने और छह महीने में सुनवाई पुरी कर लेने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, नेताओं और मंत्रियों के लिए पूरे परिवार की संपत्ति की हर साल घोषणा करनी जरूरी होगी।

दिल्ली सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, इस कानून में भ्रष्टाचार की सूचना देने वाले (व्हिसल ब्लोअर) को सुरक्षा मुहैया करने का प्रावधान भी किया गया है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के लिए सभी तरह के छोटे-बड़े ठेकों को वेबसाइट पर डालना जरूरी होगा।

साथ ही तय किया गया है कि सभी लोक सेवकों को हर वर्ष 31 जनवरी तक अपने पूरे परिवार की पूरी संपत्ति की घोषणा करनी होगी। इसे वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद अगर कोई संपत्ति उसके नाम से पाई गई तो उसे भ्रष्टाचार से हासिल किया माना जाएगा, जो लोक सेवक तय समय तक यह घोषणा नहीं कर पाएगा, उसका अगले महीने का वेतन रोक दिया जाएगा।

किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा पूरी होने या इस्तीफा देने के दो साल बाद तक ऐसी किसी कंपनी में काम करने की इजाजत नहीं होगी, जिसके साथ अपने कार्यकाल में उसने सरकारी काम-काज को संपादित किया हो।

तीन सदस्यों वाले लोकपाल पीठ के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश होंगे। इनके चयन के लिए बनाई जाने वाली समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे, जबकि इस चार सदस्यों वाली चयन समिति में विधानसभा स्पीकर, मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता अन्य सदस्य होंगे। लोकपाल को सिर्फ विधानसभा में महाअभियोग के जरिए ही हटाया जा सकेगा।

यह कानून यह तय करता है कि शिकायत की जांच छह महीने में जांच पूरी करनी होगी। साथ ही विशेष अदालतों में इसकी सुनवाई भी छह महीने में पूरी कर ली जाएगी। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बताएंगे कि इसके लिए कितनी विशेष अदालतें गठित करनी होंगी। उनकी व्यवस्था सरकार तुरंत करेगी। इसके तहत छह महीने से ले कर आजीवन कारावास तक का प्रावधान किया गया है। दोषी सरकार में जितने वरिष्ठ पद पर होगा, उसकी सजा उतनी ज्यादा होगी।

तीन अहम बदलाव
दिल्ली सरकार का कानून अन्ना आंदोलन से निकले मसौदे के अधिकांश प्रावधानों को अपना रहा है, लेकिन इसमें तीन बदलाव भी किए गए हैं।

1- विभिन्न विभागों की निगरानी शाखा को इसका हिस्सा नहीं बनाया गया है। इसकी जरूरत इसलिए थी, क्योंकि पहले किसी विभाग के ही एक अधिकारी को यह जिम्मा दे दिया जाता था। मगर दिल्ली सरकार ने पहले ही इसके लिए अलग से आठ अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है, जो सीधे निदेशक, निगरानी को रिपोर्ट करते हैं।
2- समयबद्ध सेवा को सुनिश्चित करने के प्रावधानों को इसका हिस्सा नहीं बनाया गया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस संबंध में कानूनी प्रावधान करना पूरी तरह से उसके अधिकार क्षेत्र में है और लोकपाल पास होने के बाद यह अलग से इसे कर सकती है।
3- नए बिल में सर्च कमेटी गठित करने का प्रावधान नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि इतने ब्योरे कानून में शामिल करने की जरूरत नहीं। इसे बाद में सरकार नियमों के रूप में जोड़ सकती है।

लोकपाल की खास बातें
- छह महीने में होगी जांच पूरी और छह महीने में सुनवाई
- कर्मचारियों, नेताओं, अफसरों को पूरे परिवार की संपत्ति करनी होगी घोषित
- छह महीने से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान
- खजाने को हुए नुकसान की पांच गुना रकम दोषी कंपनी से वसूली जाएगी
- सभी सरकारी कांट्रेक्ट वेबसाइट पर डाले जाएंगे
- संपत्ति की घोषणा में देरी पर रुकेगा वेतन
- चयन समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे
- चयन समिति में विधानसभा स्पीकर, मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता होंगे

Posted By: Ramesh Mishra

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