दिल्ली NCR में महिला सुरक्षा पर 'सुप्रीम सख्ती' जरूरी, अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं; पहले ही करें रोकथाम
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर सख्त टिप्पणी करते हुए अपराध होने के बाद कार्रवाई की बजाय रोकथाम ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट की यह तल्ख टिप्पणी देश की राजधानी और समूचे एनसीआर में महिला सुरक्षा की बदहाल हकीकत को बयां करने के लिए काफी है। एआई इमेज
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा में अपराध रोकथाम पर सख्त टिप्पणी की।
दिल्ली-एनसीआर में अंधेरे स्थान, अपर्याप्त निगरानी प्रमुख सुरक्षा चुनौतियां।
सार्वजनिक परिवहन, त्वरित न्याय और सामाजिक भूमिका पर जोर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। "महत्वपूर्ण यह है कि अपराध को रोका जाए, न कि अपराध हो जाने के बाद आप क्या करते हैं। असामाजिक तत्वों के मन में ऐसा खौफ होना चाहिए कि वे कुछ भी गलत करने से पहले कांप उठें।" सुप्रीम कोर्ट की यह तल्ख टिप्पणी देश की राजधानी और समूचे एनसीआर में महिला सुरक्षा की बदहाल हकीकत को बयां करने के लिए काफी है।
कानून-व्यवस्था को दिखाया आईना
हाल ही में दिल्ली सहित एनसीआर में महिला असुरक्षा के कई बड़े मामले सामने आए। इस पर सर्वोच्च अदालत ने ही स्वत: संज्ञान लेकर दोटूक कहा। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आती चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म, कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में दरिंदगी और फरीदाबाद की एक खंडहर इमारत में किशोरी से हुई घटनाएं, कानून-व्यवस्था को ही आईना दिखाती हैं।
यौन शोषण के 1020 मामले हैं दर्ज
दिल्ली विश्वविद्यालय के पास छात्राओं से सरेराह छेड़छाड़ यह साबित करती है कि अपराधियों में न तो खाकी का खौफ है और न ही कानून का डर। अकेले दिल्ली में इस साल महिलाओं से यौन शोषण के 1020 मामले दर्ज होना व्यवस्था पर करारा तमाचा है।
पुलिस के खोखले दावे हैं कि 976 मामले सुलझा लिए, लेकिन जब सड़कों पर बेटियों के लिए खौफ ही है और सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी भी साफ बयां कर रही है तो आंकड़े क्या गवाही देंगे। आखिर हमारी सुरक्षा प्रणाली में यह लचरता कब दूर होगी और पुलिस प्रशासनिक विफलता की जवाबदेही कब तय होगी?
ये हों सुधार, तब बनेगी बात :
असुरक्षा के कारण
- अंधेरे क्षेत्र : सबसे बड़ा कारण : कई इलाकों, विशेषकर नए विकसित हो रहे इलाके या रिज एरिया और सुनसान सड़कों पर आज भी स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था नहीं।
- सीसीटीवी नेटवर्क और पुलिस गश्त में कमी : सार्वजनिक स्थानों, विशेषकर बसों, ऑटो स्टैंडों और खंडहर इमारतों के आसपास सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता और पीसीआर वैन की गश्त अपर्याप्त है।
- सार्वजनिक परिवहन में असुरक्षा : चलती बसों, अवैध रूप से चलने वाले वाहनों या रात के समय सार्वजनिक परिवहन के साधनों में सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति।
इस दिशा में तत्काल सुधार की जरूरत
- शत-प्रतिशत लाइटिंग : पूरे एनसीआर में 'जीरो टालरेंस फार डार्क स्पाट्स' नीति लागू हो।
- स्मार्ट सर्विलांस: एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगें।
- खाली इमारतों की निगरानी
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अनिवार्य मार्शल।
- जीपीएस ट्रैकिंग: सभी आटो, कैब और बसों का लाइव जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम पुलिस मुख्यालय से जुड़े।

दिल्ली में दुष्कर्म के बढ़ते मामले
| दुष्कर्म के मामले | इस वर्ष बढ़ा है ग्राफ |
| वर्ष 2025 | वर्ष 2026 |
| 1195 | 2020 |
| मामले सुलझे - 1145 : 976 | |
पाेक्सो में भी आ रहे ज्यादा मामले
| वर्ष | मामले दर्ज | सुलझाए गए |
| 2024 | 1,013 | 993 |
| 2025 | 966 | 947 |
| इस वर्ष 15 सितंबर तक | 653 | 634 |
अधिकतर जानने वाले ही होते हैं आरोपित
| संबंध | वर्ष 2025 | वर्ष 2026 |
| पड़ोसी | 122 (10.2%) | 104 (10.2%) |
| दोस्त व पारिवारिक मित्र | 574 (48.0%) | 425 (41.7%) |
| रिश्तेदार | 129 (10.8%) | 123 (12.1%) |
| नियोक्ता व सहकर्मी | 17 (1.4%) | 16 (1.6%) |
| अन्य ज्ञात व्यक्ति | 348 (29.1%) | 336 (32.9%) |
| अजनबी | 5 (0.4%) | 16 (1.6%) |
छह माह में हुई बड़ी घटनाएं
- 2 अक्टूबर : साउथ एवेन्यू में पड़ोसी पर नाबालिग से कई महीनों तक दुष्कर्म और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप।
- 21 सितंबर : आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म। आरोपितों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया।
- 10 सितंबर : बाहरी उत्तर दिल्ली में 16 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या
- 4 अगस्त : कश्मीरी गेट इलाके में 17 वर्षीय छात्रा के साथ स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म
- 11 जुलाई 2026 : राजनगर एक्सटेंशन में सात वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या
- 22 जून : फुटपाथ पर परिवार के साथ सो रही 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर पहले कैब चालक ने दुष्कर्म किया और फिर हत्या कर दी।
- 23 अप्रैल : अमर काॅलोनी में आईआरएस अधिकारी की बेटी के घर में घुसकर राहुल मीणा पर दुष्कर्म, हत्या और करीब 2.5 लाख लूटने का आरोप
- 29 अगस्त 2026 : इकोटेक तीन थाना क्षेत्र में छह सलनकी बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या। बोरे बंद कर शव फेंका।
एनसीआर
गाजियाबाद में हुईं वारदातें
| वर्ष | वारदात | मामले दर्ज |
| 2023 | 139 | 117 |
| 2024 | 179 | 143 |
| 2025 | 101 | 75 |
सुरक्षा के उपाय किए
- पिंक बूथ के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराना।
- मिशन शक्ति केंद्र बने।
- महिला थाने के माध्यम से सुनवाई और कार्रवाई।
गौतमबुद्ध नगर
- 3 साल में 109 मामले छेड़छाड़ के सामने आए चुके हैं।
- 130 आरोपित जेल भेजे गए, 37 को सजा हुई।
...ताकि सुरक्षित रहें
- मिशन शक्ति अभियान, सेफ सिटी मिशन और विशेष गश्त
- 20 से ज्यादा महिला पिंक बूथ बने।
- 300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे
महिला हेल्पलाइन (1090, 181, 1091)
फरीदाबाद
| वर्ष | दर्ज मामले | सजा |
| 2023 | 319 | 15 |
| 2024 | 105 | 12 |
| 2025 | 97 | 18 |
महिला सुरक्षा उपाय क्या किए
- हाॅटस्पाॅट चिन्हित किए सीसीटीवी, गश्त, दुर्गा शक्ति टीम, महिला हेल्प डेस्क और जागरूकता अभियान पर जोर।
- 300 स्थान चिन्हित किए और वहां सीसीटीवी और गश्त बढाई।
- महिला हेल्पलाइन 1091 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 दी गई।
गुरुग्राम
- 3 साल में मामले दर्ज हुए : 381
- कितने मामलों में सजा हुई : 25
- 3 साल में छेड़छाड़ के मामले : 350
महिला सुरक्षा के मद्देनजर
- विभिन्न थाना क्षेत्रों में महिला हेल्प डेस्क बनाई गई।
- स्कूल, काॅलेज, मेट्रो स्टेशन, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में दुर्गा शक्ति टीम गश्त करती है
- सादी वर्दी में पुलिस की तैनाती।
क्या आप मानते हैं कि दिल्ली समेत एनसीआर में महिला सुरक्षा की स्थिति विगत कुछ वर्षों के मुकाबले और बिगड़ी है?
- हां : 87
- नहीं : 13
क्या पुलिस अधिकारियों को सीधे जवाबदेह बनाकर दिल्ली समेत एनसीआर में महिला सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है?
- हां : 91
- नहीं : 9
हर महिला के मन में हो सुरक्षा का विश्वास
दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में महिला सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कुछ क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। सबसे पहले हर डार्क स्पाट की पहचान और समयबद्ध समाधान जरूरी है। इसके लिए हर सड़क, गलियों, बस स्टाप, पार्किंग, फुटपाथ, मेट्रो स्टेशनों और बाजारों का नियमित सेफ्टी ऑडिट किया जाना चाहिए।
जहां स्ट्रीट लाइट खराब है या अंधेरा रहता है, वहां संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। दूसरा सीसीटीवी को सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना जरूरी है। सीसीटीवी की प्रभावी निगरानी, डाटा सुरक्षा और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए।
संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी के साथ पर्याप्त प्रकाश और पुलिस की दृश्य उपस्थिति भी होना जरूरी है। सीसीटीवी का उद्देश्य केवल घटना को रिकार्ड करना नहीं, बल्कि अपराध की रोकथाम और त्वरित सहायता सुनिश्चित करना होना चाहिए। असुरक्षित स्थानों से जुड़ी शिकायतों के लिए संबंधित विभाग व जिम्मेदार अधिकारी समाधान की समय सीमा स्पष्ट करें, ताकि शिकायत दर्ज होने के साथ निगरानी भी हो सके।
तीसरा, पुलिसिंग दिखाई देनी चाहिए, जिससे सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। कालेज, हास्टल, बाजार, मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड और कार्यालय क्षेत्रों में पैदल गश्त, पीसीआर और मोबाइल पुलिस वैन की प्रभावी तैनाती होनी चाहिए। वहीं सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए और सुरक्षित बनाना होगा। बस, मेट्रो, आटो और टैक्सी में सीसीटीवी, जीपीएस, इमरजेंसी असिस्टटेंस और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था करनी किया जाना जरूरी है।
इसके अलावा लास्ट माइल सेफ्टी पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि बस या मेट्रो से उतरने के बाद महिलाओं-बेटियों का घर तक का सफर भी सुरक्षित हो। महिलाओं और छात्राओं द्वारा अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मार्गों को सेफ रूट्स के रूप में चिन्हित कर इन मार्गों पर प्रकाश, सीसीटीवी, पुलिस पेट्रोलिंग, सुरक्षित बस स्टाप, फुटपाथ, सार्वजनिक शौचालय और इमरजेंसी असिस्टेंस सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शहर में महिलाओं के लिए सुरक्षित तंत्र बनाने को वार्ड, बाजार, कालेज और आरडब्ल्यूए में ‘महिला सुरक्षा साथी’ जैसे नेटवर्क विकसित किए जा सकते हैं। हर महिला और परिवार को 112 आपातकालीन सहायता, 1091 दिल्ली पुलिस महिला हेल्पलाइन, 181 महिला सहायता हेल्पलाइन जैसे प्रमुख सहायता नंबरों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
रात में बाजारों, मेट्रो स्टेशनों, बस स्टाप, हास्टलों, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील मार्गों पर चल रही नाइट पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाए, ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें। सुरक्षित दिल्ली, सुरक्षित एनसीआर केवल एक संकल्प नहीं, हर महिला के मन में सुरक्षा का विश्वास है। और यह विश्वास हम सबके साथ, सबके सहयोग से जरूर पूरा होगा।
(दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने जैसा बातचीत में शालिनी देवरानी को बताया)
पुलिस के साथ परिवार और स्कूल भी निभाएं जिम्मेदारी
राजधानी में महिलाओं के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस की मुस्तैदी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने, बच्चों को बचपन से ही सही संस्कार देने और आपराधिक मामलों में जल्द सजा सुनिश्चित करने की जरूरत है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध की रोकथाम के लिए परिवार, स्कूल, समाज और आपराधिक न्याय प्रणाली सभी को अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभानी होगी। महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा बच्चों को स्कूल स्तर से ही दी जानी चाहिए। बच्चों को यह समझाने की जरूरत है कि महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए और उनकी गरिमा, स्वतंत्रता और सहमति का सम्मान क्यों जरूरी है।
केवल पाठ्यक्रम में कुछ अध्याय जोड़ने से बात पूरी नहीं होगी, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में यह सोच विकसित करनी होगी कि महिला और पुरुष दोनों समान सम्मान के हकदार हैं। पहले संयुक्त परिवारों में बच्चों का पालन-पोषण केवल माता-पिता तक सीमित नहीं रहता था। परिवार के दूसरे सदस्य भी बच्चों के व्यवहार पर नजर रखते थे और उन्हें सामाजिक मर्यादाओं के बारे में समझाते थे।
समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, अपराध रोकने के लिए सामाजिक और शैक्षिक प्रयासों के साथ कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों में कानून का भय पैदा होना जरूरी है। इसके लिए पुलिस की मुस्तैदी, त्वरित जांच और प्रभावी अभियोजन के साथ सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आपराधिक न्याय प्रणाली की है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में लंबे समय तक मुकदमे चलना भी गंभीर चुनौती है। यदि किसी मामले में आरोपित लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में फंसा रहता है और वर्षों तक फैसला नहीं आता, तो इसका असर समाज में कानून के डर पर पड़ता है। अपराधी को यह संदेश मिलना चाहिए कि अपराध के बाद कानूनी कार्रवाई निश्चित और समयबद्ध होगी। इसलिए पुलिस की जांच में तेजी के साथ अदालतों में मामलों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।
गवाहों की सुरक्षा, अभियोजन की क्षमता बढ़ाने, फोरेंसिक जांच में तेजी लाने और सुनवाई के दौरान अनावश्यक देरी रोकने जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं। महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी मानना समस्या का पूरा समाधान नहीं है। अपराध होने के बाद कार्रवाई जितनी जरूरी है, उससे अधिक महत्वपूर्ण अपराध की मानसिकता को बनने से रोकना है। इसके लिए बच्चों को छोटी उम्र से ही सम्मान, समानता, सहमति और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाना होगा।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए एक तरफ परिवार और स्कूलों को बच्चों के सोच और व्यवहार पर काम करना होगा, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और न्याय प्रणाली को यह भरोसा कायम करना होगा कि अपराध करने पर कार्रवाई तय है और सजा में अनावश्यक देरी नहीं होगी। सामाजिक नियंत्रण, बेहतर शिक्षा, परिवार की जिम्मेदारी और त्वरित न्याय इन चारों स्तरों पर एक साथ काम करके ही महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
(तिहाड़ जेल की पूर्व पुलिस महानिदेशक विमला मेहरा ने जैसा बातचीत में मोहम्मद साकिब को बताया)
