नई दिल्ली (माला दीक्षित)। भूमि अधिग्रहण निरस्त होने से नोएडा सेक्टर 107 की फंसी पड़ी बिल्डर परियोजनाओं का भविष्य क्या होगा? इस पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। बिल्डरों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर भूमि अधिग्रहण रद करने के आदेश को चुनौती दी है।

फिलहाल मसला इस बात पर अटका है कि सुप्रीम कोर्ट का भूमि अधिग्रहण रद करने का आदेश सिर्फ उस भूस्वामी की जमीन तक सीमित माना जाए, जिसने अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी या फिर अधिग्रहण की पूरी अधिसूचना रद मानी जाएगी, जिससे कि कोर्ट न आने वाले लोंगों का अधिग्रहण भी स्वत: रद हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2013 को राजेन्द्रा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए नोएडा के सलारपुर खादर गांव जो कि सेक्टर 107 में पड़ता है, की भूमि अधिग्रहण अधिसूचना रद कर दी थी। कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 4 और 6 के तहत जारी की गई 11 सितंबर 2008 व 30 सितंबर 2009 की अधिसूचना रद कर दी थी।

यह फैसला जब रिहायशी परियोजनाएं बना रहे बिल्डरों के संज्ञान में आया तो उन्होंने पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल कीं। हालांकि, तबतक फैसला देने वाले दो न्यायाधीशों में से एक जस्टिस सिंघवी सेवानिवृत्त हो चुके थे। पुनर्विचार याचिकाओं में बिल्डरों की दलील है कि कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बगैर अधिग्रहण रद कर दिया।

अधिग्रहण रद होने से उनके हित प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि नोएडा अथारिटी ने 2010 में ही उन्हें जमीन पट्टे पर दे दी थी। उस जमीन पर फ्लैट बुक हो चुके हैं और तीसरे पक्ष के हित भी सृजित हो चुके हैं।

बिल्डरों का कहना है कि राजेंद्र एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड ने अधिग्रहण को चुनौती दी थी, इसलिए सिर्फ उसी की जमीन का अधिग्रहण रद माना जाएगा न कि सारी जमीन का।

Posted By: JP Yadav