नई दिल्ली । ट्रेन खासकर इसके शौचालय की सफाई को लेकर रेल प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। चलती ट्रेन में सफाई की सुविधा के साथ ही परंपरागत शौचालय को बदलकर जैविक शौचालय लगाने का काम चल रहा है।

वहीं, अब हवाई जहाज की तरह ट्रेनों में भी वैक्यूम टॉयलेट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिससे कि इसके परिणाम का पता चल सके। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी इसकी शुरुआत होगी।

प्रायोगिक तौर पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी वैक्यूम टॉयलेट बनाने की योजना है। इसके साथ ही चलती ट्रेन में भी इसका परीक्षण किया जाएगा। इसलिए दिल्ली मंडल ने फस्र्ट एसी एक कोच में इसे लगाया है। इस कोच को लंबी दूरी के किसी ट्रेन के साथ जोड़ा जाएगा।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस कोच का निरीक्षण भी किया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के शौचालय से ट्रेन की सफाई व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी।

रेल पटरी पर नहीं गिरेगी गंदगी
वैक्यूम टॉयलेट की सफाई पानी के बजाय दबाव तकनीक से किया जाता है। गंदगी नीचे लगे एक टैंक में जमा हो जाता है। इस टैंक में एक विशेष बैक्ट्रिया होता है जो गंदगी को द्रव में बदल देता है। सफाई के समय इस गंदगी को टैैंक से बाहर निकाल दिया जाता है।

इस तरह से इस शौचालय के प्रयोग से रेल की पटरी पर गंदगी नहीं फैलेगी। इससे जहां पटरियों को नुकसान नहीं पहुंचेगा वहीं, पर्यावरण बचाने में भी मदद मिलेगी। मल-मूत्र गिरने से पटरियों को भारी नुकसान होता है जिन्हें बार-बार बदलने में अच्छी खासी रकम की जरूरत पड़ती है। इस तरह से रेलवे को आर्थिक लाभ भी होगा।

जैविक शौचालय भी लगाए जा रहे हैं
सद्भावना एक्सप्रेस, इंदौर इंटरसिटी, मसूरी एक्सप्रेस और श्रीगंगानगर - बीकानेर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में जैविक शौचालय भी लगाए गए हैं। वहीं, कई अन्य ट्रेनों में इसे लगाने की योजना है। इससे भी रेल पटरियों पर गंदगी नहीं फैलती है।

Posted By: Ramesh Mishra

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