जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :

कोरोना के संक्रमण काल के बीच हिदू-मुस्लिम एकता के भी कई उदाहरण सामने आए हैं। ऐसा ही किस्सा असम से सामने आया है, जिसका गवाह सर गंगाराम अस्पताल बना। दरअसल असम में बाढ़ और लॉकडाउन में फंसे लिवर के एक मरीज लालचंद बिस्वास की हालत काफी खराब हो गई थी। उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत थी। ऐसे में उनकी मदद के लिए उनके फार्मासिस्ट दोस्त मोफिसुर रहमान आगे आए। उन्होंने राजधानी स्थित सर गंगाराम अस्पताल के लिवर के विशेषज्ञ डॉ. उशस्त धीर से संपर्क साधा। टेलीकान्फ्रेंसिग के जरिये डॉ. धीर के निर्देशानुसार मोफिसुर रहमान ने लालचंद को इंजेक्शन देने के साथ इलाज की अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया। हालांकि इस दौरान नेटवर्क और भाषा ने अड़चन बनने की कोशिश की लेकिन दोनों बाधाओं को पार कर लिया गया।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक करीब 15 दिन पहले मोफिसुर रहमान ने डॉ. धीर से संपर्क साधा था। उन्होंने बताया कि उनके मित्र लालचंद की हालत काफी नाजुक हो गई है। पेट में सूजन होने के साथ सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वह नींद की आगोश में भी जा रहा है। डॉ. धीर ने अस्पताल के कर्मचारियों की मदद से टेलीकान्फ्रेंसिग की व्यवस्था की गई। लेकिन लालचंद जहां पर थे, वहां नेटवर्क नहीं था। इसकी वजह से संपर्क करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में लालचंद को एक नाव से ऐसी जगह पर पहुंचाया गया, जहां नेटवर्क मिल गया। यहां डॉ. धीर के निर्देशानुसार रहमान ने इलाज की प्रक्रिया पूरी की। डॉ. धीर ने बताया कि इस दौरान भाषा की भी दिक्कत हुई। एक घंटे के बाद फिर से मरीज से संपर्क किया गया तो उनकी हालत स्थिर थी। अब उन्हें आगे के इलाज के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है। मोफिसुर रहमान ने बताया कि अगर जल्द चिकित्सकीय मदद नहीं मिलती तो लालचंद की जान जा सकती थी। लालचंद के परिवार में कोई नहीं है जो उनकी देखरेख कर सके। ऐसे में वह एकमात्र सहारा थे। इसी वजह से उन्होंने गंगाराम में संपर्क किया।

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