जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली : कोर्ट के आदेश की आड़ में यमुनापार में कई घरेलू रोजगार को बंद कर दिया गया। घरों में छोटे-मोटे काम कर रहे लोगों की रोजी-रोटी खत्म हो गई। निगम अधिकारियों ने इन्हें भी फैक्ट्री मानते हुए सील कर दिया। यह पूरी तरह से गलत था। ताज्जुब की बात यह है कि इसमें पार्षदों को विश्वास में नहीं लिया गया। स्थायी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर पार्षदों ने अधिकारियों की जमकर ¨खचाई की।

पार्षद सत्यपाल ¨सह ने कहा कि उनके इलाके में निगम के अधिकारी सी¨लग के नाम पर गरीब लोगों का रोजगार उजाड़ रहे हैं। उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर उन फैक्ट्रियों को भी सील कर रहे हैं जो प्रदूषण फैलाने वाली नहीं है। इसके चक्कर में गरीब आदमी परेशान है। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी सीलमपुर, जाफराबाद, उस्मानपुर, मुस्तफाबाद आदि क्षेत्र में सी¨लग की कार्रवाई नहीं करते। इसके स्थान पर घर में सिलाई मशीन चला रहे लोगों के मकान सील कर रहे हैं। मौके पर अधिकारी पार्षद की भी नहीं सुनते। इससे पार्षदों की छवि खराब हो रही है। उन्होंने निगम से कहा कि जब भी कार्रवाई हो, संबंधित वार्ड के पार्षद को इसकी सूचना दी जाए। निगम पार्षद गुरजीत कौर ने कहा कि कार्रवाई के मामले में अधिकारी पूरी मनमानी करते हैं। एक माह पहले उन्होंने जोन की बैठक में अपने वार्ड में चलने वाली तेजाब और जींस की करीब 40 फैक्ट्रियों की सूची सौंपी थी। ये प्रदूषण फैला रहे हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक पार्षद अपनी जान जोखिम में डालकर सूची दे रहा है, लेकिन अधिकारी इसे अनसुना कर रहे हैं। समिति की सदस्य और आप की पार्षद रेखा त्यागी ने कहा कि यह गंभीर स्थिति है। महिला पार्षद की शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षदों ने कहा कि कई वार्डो में फैक्ट्रियों की पहचान करने के लिए सफाई कर्मचारियों को काम पर लगा दिया गया है। स्थायी समिति अध्यक्ष प्रवेश शर्मा ने निगम आयुक्त से कहा कि अब कोई भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को एक हफ्ते पहले नोटिस दें। साथ ही जिन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होनी है, उसकी सूची भी स्थायी समिति को दी जाए।

Edited By: Jagran