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दिल्ली जिमखाना क्लब मामले में सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करे हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

Published: Mon, 05 Oct 2026 09:41 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों की याचिका पर विचार करने का निर्देश ...और पढ़ें

दिल्ली जिमखाना क्लब मामले में सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करे हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली जिमखाना क्लब मामले में सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करे हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को सदस्यों की याचिका पर सुनवाई का निर्देश।

  2. क्लब सदस्यों ने केंद्र सरकार के परिसर कब्जे व बेदखली को चुनौती दी।

  3. सरकार नियुक्त समिति सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों की उस याचिका पर विचार करने को कहा, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने और इसके बाद शुरू की गई बेदखली की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को क्लब के सदस्यों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था कि केंद्र के फैसले को केवल क्लब ही चुनौती दे सकता है। सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट ने सदस्यों से कहा था कि वे शीर्ष अदालत से यह स्पष्टता प्राप्त करें कि वे भी मामले में याचिका दाखिल कर सकते हैं।

केंद्र सरकार द्वारा नामित एक समिति क्लब का प्रबंधन कर रही है : सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने सदस्यों को हाई कोर्ट का रुख करने की अनुमति दे दी। 11 सदस्यों की ओर से पेश हुए सिंह ने पहले पीठ को बताया था कि केंद्र सरकार द्वारा नामित एक समिति क्लब का प्रबंधन संभाल रही है और यह समिति सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती। तीन सितंबर को केंद्र ने एक अलग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि वह 16 सितंबर तक क्लब को सफदरजंग रोड स्थित परिसर से बेदखल करने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

हाई कोर्ट क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रह था, जिनमें क्लब के प्रबंधन को 29 जून को भूमि और विकास कार्यालय के एस्टेट अधिकारी द्वारा जारी बेदखली के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। जबकि विपिन अग्रवाल और क्लब के 10 अन्य सदस्यों ने अपने वकील नितिन सलूजा के माध्यम से दायर याचिका में भूमि और विकास कार्यालय द्वारा 22 मई को जारी संपत्ति वापस लेने का नोटिस और एस्टेट अधिकारी द्वारा 29 जून को जारी कारण बताओ नोटिस रद करने की मांग की थी। विकास सिंह ने कहा था, 'यहां, पट्टा देने वाला और पट्टा लेने वाला दोनों ही सरकार के नियंत्रण में हैं।