अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद सिद्दीकी पर ईडी की चार्जशीट, साकेत कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग की सुनवाई 13 फरवरी तक टली
साकेत कोर्ट ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर सुनवाई 13 फरवरी ...और पढ़ें

एजेंसी ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की थी। फाइल फोटो

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की चार्जशीट पर सुनवाई 13 फरवरी तक के लिए टाल दी है। एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान ने शनिवार को मामले की सुनवाई कर रहीं थीं। बचाव पक्ष के वकील ने चार्जशीट और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के लिए और समय मांगा, क्योंकि ये दस्तावेज 10 हजार पन्नों के हैं।
चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दायर
इसके अलावा वे सिद्दीकी से मिल भी नहीं पाए हैं क्योंकि क्राइम ब्रांच ने उन्हें एक दूसरे मामले में हिरासत में ले लिया है।ईडी ने 16 जनवरी को हरियाणा स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को अटैच किया था, जो 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आई थी। एजेंसी ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की थी।
नामांकित छात्रों के साथ धोखाधड़ी
फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ जमीन और उसकी इमारतें, जिसमें उसके विभिन्न स्कूलों और विभागों के अलावा हास्टल भी शामिल हैं, को मनी लान्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत जारी एक अंतरिम आदेश के हिस्से के रूप में अटैच किया गया है। ईडी ने नवंबर 2025 में सिद्दीकी को मनी लान्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था, जो उनके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में नामांकित छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े थे।
नैक मान्यता को लेकर भ्रामक दावे
अल फलाह ग्रुप में एजेंसी की जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई दो एफआइआर से शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों, माता-पिता और अन्य हितधारकों को गैर-कानूनी फायदे के लिए गुमराह करने के लिए नैक व यूजीसी मान्यता के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए थे।
ईडी ने पहले कहा था कि यूनिवर्सिटी ने 2018 और 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट किया, और इसे आय में 'तेजी से बढ़ोतरी' बताया, जो ग्रुप के घोषित वित्तीय या उसकी संपत्ति निर्माण से मेल नहीं खाता था।
इसमें आरोप लगाया गया कि छात्रों की फीस और जनता से जमा किए गए फंड को व्यक्तिगत और निजी इस्तेमाल के लिए डायवर्ट किया गया, और सिद्दीकी ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, मैनेजिंग ट्रस्टी, साथ ही संबंधित संस्थाओं पर वास्तविक नियंत्रण बनाए रखा।
इस तरह जांच के दायरे में आया ट्रस्ट
एक 'व्हाइट-कॉलर टेरर' माड्यूल की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी की भूमिका जांच के दायरे में आई। यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डाॅक्टरों मुजम्मिल अहमद गनई और शाहीन सईद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। यूनिवर्सिटी के अस्पताल से जुड़े एक और डाॅ. उमर-उन-नबी की पहचान उस आत्मघाती हमलावर के रूप में हुई, जिसने 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटक से भरी कार चलाई थी, जिसमें धमाका हुआ और 15 लोग मारे गए।
