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साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा, हिंदी के लिए वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया को मिलेगा सम्मान

Published: Mon, 16 Mar 2026 04:55 PM (IST)

साहित्य अकादमी ने वर्ष 2025 के लिए 24 भारतीय भाषाओं के पुरस्कारों की घोषणा की है। हिंदी की वरिष्ठ लेखिका ...और पढ़ें

ममता कालिया को बहुचर्चित संस्मरण ''जीते जी इलाहाबाद'' के लिए साहित्या अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा।

ममता कालिया को बहुचर्चित संस्मरण ''जीते जी इलाहाबाद'' के लिए साहित्या अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारतीय साहित्य की गौरवशाली संस्था साहित्य अकादमी ने सोमवार को वर्ष 2025 के लिए अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा कर दी है, जिसमें 24 भारतीय भाषाओं के मूर्धन्य रचनाकारों के नामों पर मुहर लगाई गई है। अंग्रेजी लेखक नवतेज सरना और हिंदी लेखिका ममता कालिया उन 24 लेखकों में शामिल हैं, जिन्हें 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

शब्द-शिल्पियों का महाकुंभ और सम्मान की गूंज इस वर्ष के पुरस्कारों में विधाओं की विविधता और अनुभवों की गहराई का अनूठा संगम देखने को मिला है। जहां अंग्रेजी साहित्य के लिए पूर्व राजदूत और प्रख्यात लेखक नवतेज सरना को उनके कालजयी उपन्यास 'क्रिमसन स्प्रिंग' के लिए चुना गया है। वहीं हिंदी साहित्य की वरिष्ठ हस्ताक्षर ममता कालिया को उनके संस्मरण 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाएगा।

31 मार्च को आयोजित होगा समारोह

अकादमी द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, इस बार आठ कविता संग्रह, चार उपन्यास, छह कहानी संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरणों को पुरस्कृत किया गया है। प्रत्येक विजेता को 31 मार्च को आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका, शाल और एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

यह घोषणा उस प्रतीक्षा के बाद आई है जब दिसंबर 2025 में प्रस्तावित प्रेस वार्ता को किन्हीं कारणों से स्थगित कर दिया गया था, जिससे साहित्य प्रेमियों में उत्सुकता और बढ़ गई थी। क्षेत्रीय भाषाओं की महक और विविधता का उत्सव भारत की भाषाई संपन्नता को रेखांकित करते हुए बांग्ला (श्रेष्ठ कविता) में प्रसून बंद्योपाध्याय, गुजराती (भट्टखडकी) में योगेश वैद्य और कन्नड़ (दादा सीरिसु तांडे) में अमरेश नुगदोनी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए चुना गया है।

राजस्थानी में जितेंद्र कुमार सोनी को सम्मान

राजस्थानी में जितेंद्र कुमार सोनी की कृति 'भरखामा' और पंजाबी में जिन्दर की 'सेफ्टी किट' ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सांस्कृतिक एकता का साहित्यिक सूत्र संस्कृत (प्रस्थानचतुस्तये ब्रह्मघोष:) के लिए महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास और उर्दू (सफर जारी है) के लिए प्रीतपाल सिंह बेताब के नाम इस सूची की गरिमा बढ़ा रहे हैं।

चाहे वह संताली (मिड बिरना चेन्ने साओन इनाग सागाई) में सुमित्रा सोरेन की रचना हो या मलयालम (मायामनुष्यर) में एन. प्रभाकरन का जादू, यह पुरस्कार सूची सिद्ध करती है कि भारतीय साहित्य अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ और वैश्विक दृष्टि से संपन्न है। ये 24 नाम केवल लेखकों के नाम नहीं हैं, बल्कि उन 24 जीवंत संस्कृतियों के प्रतिनिधि हैं जो एक अखंड भारत के वैचारिक ताने-बाने को बुनते हैं।

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