48 साल की IVF यात्रा में नया पड़ाव, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हुआ 100वां जन्म
सफदरजंग अस्पताल ने भारत में आईवीएफ की 48 साल की यात्रा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। ...और पढ़ें

शनिवार को वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग अस्पताल में आईवीएफ से जन्मे 100वें बच्चे का जन्म होने पर विशेष समारोह आयोजित किया गया।
HighLights
सफदरजंग अस्पताल ने आईवीएफ से 100वें बच्चे के जन्म का जश्न मनाया।
भारत में आईवीएफ की 48 साल की सफल यात्रा का प्रतीक।
पहला आईवीएफ बच्चा 'दुर्गा' 3 अक्टूबर 1978 को कोलकाता में जन्मा।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। संतान की चाह में वर्षों का इंतजार करने वाले कई परिवारों को आईवीएफ तकनीक ने ऐसे ही अनेक परिवारों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी पहुंचाई है।
इस उम्मीद की भारतीय यात्रा के 48 साल पूरे होने के दिन सफदरजंग अस्पताल ने भी अपनी एक खास उपलब्धि दर्ज की।
शनिवार को वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग अस्पताल में आईवीएफ से जन्मे 100वें बच्चे का जन्म होने पर विशेष समारोह आयोजित किया गया।
48 साल पहले हुई थी शुरुआत
खास बात यह रही कि तीन अक्टूबर की तारीख भारत में आईवीएफ की पहली सफलता से भी जुड़ी है। तीन अक्टूबर 1978 को कोलकाता में भारत के पहले आईवीएफ बच्चे कनुप्रिया अग्रवाल का जन्म हुआ था।
उन्हें प्यार से ‘दुर्गा’ कहा जाता है। डाॅ. सुभाष मुखोपाध्याय के प्रयासों से हुए इस जन्म ने देश में सहायक प्रजनन तकनीक के नए दौर की शुरुआत की थी। 48 साल बाद इसी तारीख को सफदरजंग अस्पताल में 100वें आईवीएफ जन्म का पड़ाव पूरा हुआ।

विश्वास, प्रतीक्षा और उम्मीद की लंबी यात्रा
इस अवसर पर सबसे भावुक तस्वीर उन परिवारों की रही, जो अपने आईवीएफ से जन्मे बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचे। कभी संतान की उम्मीद लेकर यहां आए ये दंपती अब अपने बच्चों को चिकित्सकों के सामने लेकर पहुंचे थे। बच्चों को देखकर आईवीएफ टीम के लिए यह उपलब्धि केवल 100 का आंकड़ा नहीं, बल्कि विश्वास, प्रतीक्षा और उम्मीद की लंबी यात्रा बन गई।
टीम के प्रयासों की सराहना की
सफदरजंग अस्पताल के आईवीएफ केंद्र में दंपती को आईयूआई (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन), आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) और आईसीएसआई (इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन) जैसी सहायक प्रजनन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अस्पताल की निदेशक डाॅ. कविता शर्मा ने कहा कि आईवीएफ से जन्मे बच्चों को उनके परिवार के साथ दोबारा अस्पताल में देखना बेहद खुशी का क्षण है।
उन्होंने परिवारों के विश्वास और आईवीएफ टीम के समर्पण के लिए आभार जताया। चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. चारु बंबा ने परिवारों को बधाई दी और टीम के प्रयासों की सराहना की।
डाॅ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को सराहा
कार्यक्रम में विभाग की एचओडी डाॅ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को भी रेखांकित किया गया। कार्यवाहक एचओडी डाॅ. सरिता शम्सुंदर ने अतिथियों का स्वागत किया। आईवीएफ प्रभारी और पूर्व एचओडी डाॅ. बिंदु बजाज ने कार्यक्रम का समन्वय किया।
डाॅ. गरिमा, डाॅ. दिव्या, डाॅ. रीता, सिस्टर लेथा और उनकी टीम सहित चिकित्सकों, नर्सों, भ्रूण विशेषज्ञों व तकनीशियनों ने भी योगदान दिया। कार्यक्रम में डाॅ. पंकज तलवार, डाॅ. सुधा प्रसाद और डाॅ. बनश्री दास मौजूद रहीं।
