जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि आज पहली बार भारत वैश्विक पटल पर अपनी मूल पहचान से जाना जा रहा है। मतलब भारत जो है, वह नहीं है और ऐसा कहने वाले व खुद को उदार बताने वाले लोग भारत की बात करने वालों के प्रति उतने ही कट्टर थे।

वैद्य नेहरू स्मारक एवं पुस्तकालय में 70 वर्ष पूरे होने पर पांचजन्य व ऑर्गनाइजर के विशेष अंक के विमोचन के दौरान संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण व कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक व दिल्ली के सह संघचालक आलोक कुमार, भारत प्रकाशन के समूह संपादक जगदीश उपासने के साथ दोनों पत्रिकाओं के संपादक व पूर्व संपादक भी मौजूद थे।

मनमोहन वैद्य ने अभारतीय व भारतीय मानकों को परिभाषित करते हुए कहा कि अभारतीय एक ऐसा समूह है जो भारत को तोड़ने की कोशिशों में जुटा है। पहले यह अंदर से मिले थे। अब इनकी संयुक्त साजिश खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने जेएनयू को अभारतीय और बीएचयू को भारत के अध्यात्म आधारित जीवन पद्धति को आगे बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने दोनों पत्रिकाओं को संघ का मुखपत्र बताए जाने पर ऐतराज जताते हुए कहा कि संघ में ऐसी परंपरा नहीं रही है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने चुटकी लेते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसा समझते हैं कि उन्हें निर्भीक पत्रकारिता, बोलने की आजादी और धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित करने का खिताब प्राप्त है, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट तौर पर समझना चाहिए कि बोलने की आजादी के नाम पर देश को तोड़ने वाली शक्तियों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने छद्म धर्मनिरपेक्ष शक्तियों के बारे में आज की युवा पीढ़ी को जागरूक करने पर बल दिया। आलोक कुमार ने कहा कि जब भी राष्ट्रवादी व रचनात्मक कार्यो के आंदोलन के साथ संघ के प्रवाह को जानना समझना होगा तो भारत प्रकाशन की दोनों पत्रिकाएं उनकी मददगार होंगी।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप