आपको भी TPDDL के नाम पर 13 रुपये जमा कराने का मैसेज आया? भूलकर भी न करें क्लिक; उड़ जाएंगे लाखों रुपये
साइबर ठग टाटा पावर डीडीएल के नाम पर 13 रुपये की ऑनलाइन पेमेंट करवाकर लोगों के खाते खाली कर रहे ...और पढ़ें

दिल्ली में लिंक भेजकर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए। फोटो: सांकेतिक
HighLights
टाटा पावर डीडीएल के नाम पर 13 रुपये की ठगी
उत्तरी दिल्ली में 45 से अधिक मामले, लाखों की धोखाधड़ी
बिजली कनेक्शन आवेदकों को निशाना बना रहे साइबर ठग
संजय कुमार, बाहरी दिल्ली। एपल फोन हैक कर ठगी का मामला अभी निपटा भी नहीं है कि टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के नाम पर ऑनलाइन 13 रुपये जमा कराने के नाम पर कई खाते साइबर ठगों ने खाली कर दिए हैं।
अकेले नार्थ दिल्ली में 45 के करीब ऐसे फ्रॉड सामने आ चुके हैं, जिनकों लाखों रुपये का चूना लग गया है। अब दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा पूरी राजधानी का डाटा एकत्रित करने की तैयारी में है, जिससे यह आंकड़ा काफी बड़ा हाे सकता है।
सूत्रों के अनुसार नार्थ दिल्ली में 45 के करीब ऐसे फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, जिनमें लाखों रुपये की ठगी की गई है। एक लाख से नीचे की ठगी की शिकायतों की तो गिनती ही नहीं है। इसकी मुख्य वजह साइबर क्राइम में एक लाख रुपये से नीचे की रकम वाली शिकायत की एफआईआर न होना है।
लेकिन इनकी शिकायतों की संख्या बहुत अधिक है। अब इन सभी केसों ने विभाग को सोचने पर मजबर कर दिया है कि पूरी दिल्ली में यह आकड़ा काफी बड़ा होगा। ठगी का यह नेटवर्क करोड़ों रुपये का हो सकता है।
बिजली का कनेक्शन लेने वालों के साथ हो रही ठगी
यह ठगी बिजली का कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के साथ हो रही है। अधिकांश इस मामले में आर्थिक रूप से कमजोर तबका अधिक फंस रहा है। आवेदक के बिजली कनेक्शन की फाइल जमा करते ही एप्लीकेशन नंबर जनरेट हो जाता है।
इसके बाद केवाईसी कराने या जल्द काम कराने के नाम पर ये ठग लिंक भेजते हैं। जैसे ही आवेदक लिंक खोलता है तो एपीके फाइल डाउनलोड हो जाती है और मोबाइल का एक्सेस साइबर ठग के पास चला जाता है।
भ्रम में डालने के लिए इसमें TPDDL का लिंक लिखा होता है। इसमें पूछा जाता है कि क्या आप फाइल जमा करना चाहते हैं जो अलाउ करें। इसके बाद 13 रुपये की पेमेंट मांगी जाती है और जैसे ही पेमेंट होती है तो ठगी हो जाती है।
होशियारी नहीं आती काम
साइबर ठग अज्ञानता का लाभ उठाते हैं। आवेदकों की होशियारी जल्दबाजी में धरी रह जाती है। कई आवेदक पेमेंट नहीं करते, लेकिन लिंक उनके फोन में अपलोड हो चुका होता है। स्क्रीन मिरर पर चली जाती है और ठग पूरा मोबाइल खंगाल देते हैं।
वह फोन में यह तक देख चुके होते हैं कि कौनसा यूपीआई प्रयोग हो रहा है और वे ओटीपी तक रिसेट कर लेते हैं। एपीके फाइल से स्क्रीन सफेद हो जाती है और आमजन समझ ही नहीं पाता, दूसरी तरफ ठग अपना काम आसानी से कर देते हैं।
यह बरतें सावधानी
दिल्ली पुलिस के साइबर एक्सपर्ट के अनुसार, बिजली का कनेक्शन लेने के चक्कर में आवेदक की एक गलती से उसके खुद के अकाउंट से उसका कनेक्शन कट सकता है। इसलिए जरूरी है कि गुगल के प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
आई फोन है तो आईओएस एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें। इसके अलावा यदि कोई कहीं से कोई लिंक या फाइल डाउनलोड करता है तो वह साइबर ठगों के चक्कर में फंस सकता है। समस्या होने पर 190 पर फोन करें व विभाग की वेबसाइट पर संपर्क करें।
