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    Road Safety: कोहरे में लापरवाह ड्राइविंग भी बन रही मौत का कारण, दिल्ली में अब तक 1056 लोगों की गई जान

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 02:12 AM (IST)

    दिल्ली में कोहरे के कारण सड़क सुरक्षा खतरे में है। लापरवाही के चलते इस साल 1056 लोगों की जान जा चुकी है। कोहरे में दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। तेज गति और यातायात नियमों का उल्लंघन करने से स्थिति और गंभीर हो रही है। वाहन चालकों को सावधानी बरतने और नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

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    राजघाट के समीप रिंग रोड पर छाए धुंध में ओवरटेक करते हुए सरपट दौड़ते वाहन। जागरण

    मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते कोहरे में कम दृश्यता के बीच वाहन चालकों की लापरवाही सड़क हादसों के खतरे को और बढ़ा रही है। कोहरे में थोड़ी सी असावधानी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद कई चालक जोखिम भरी ड्राइविंग छोड़ने को तैयार नहीं दिखते।

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    दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार, इस वर्ष के शुरुआती सात महीनों में अनिवार्य यातायात संकेतों के उल्लंघन के 39,898 चालान किए गए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 36,140 चालान अब तक भरे ही नहीं गए हैं। वहीं 15 सितंबर तक दिल्ली में 3909 सड़क हादसे हुए, जिसमें 1056 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3705 लोग घायल हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि ट्रैफिक नियमों के प्रति वाहन चालकों का रवैया कितना लापरवाह है।

    पुलिस लगातार चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे चालकों पर सख्त कार्रवाई कर रही है, फिर भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कोहरे में होने वाले अधिकतर हादसों की वजह मानवीय त्रुटियां ही होती हैं। कम दृश्यता के बावजूद तेज गति से गाड़ी चलाना भी इसका प्रमुख कारण है। तेज रफ्तार में अचानक अवरोधों पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो जाता है और दुर्घटना हो जाती है।

    वहीं आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी न रखना भी दुर्घटना का एक कारक होता है। इसके अलावा हाई-बीम का गलत इस्तेमाल भी हादसों का एक बड़ा कारण है। कोहरे में हाई-बीम जलाने से सामने वाले चालक की दृश्यता और भी कम हो जाती है, जिससे वह सड़क का अनुमान सही तरीके से नहीं लगा पाता। वहीं अनेक चालक फाग लाइट या इंडिकेटर का उपयोग नहीं करते। कुछ गाड़ियों में बैक लाइट या रिफ्लेक्टर न होने या खराब होने की स्थिति भी देखने को मिलती है, जिससे पीछे आने वाले वाहन चालक को आगे चल रहे वाहन का अंदाजा नहीं लग पाता।

    कोहरे में मोबाइल पर काल, मैसेज, इंटरनेट मीडिया या नेविगेशन पर लगातार ध्यान रखना भी बेहद खतरनाक होता है। अचानक लेन बदलना या ओवरटेक करने की कोशिश करना भी हादसों को निमंत्रण देने जैसा है।

    इसके अलावा वाहन की तकनीकी खराबियां, ब्रेक, इंडिकेटर, वाइपर, डिफागिंग सिस्टम आदि की खराब स्थिति में वाहन चलाना कोहरे में काफी जोखिम भरा होता है। वहीं सड़क पर लगे चेतावनी संकेत, स्पीड लिमिट, फाॅग एरिया बोर्ड और डायवर्जन को नजरअंदाज करना भी दुर्घटना को दावत देना जैसा ही है। हाईवे पर बिना आवश्यकता के रुकना भी तेज रफ्तार वाहनों के बीच एक बड़ा खतरा है।

    यातायात पुलिस लोगों को कर रही जागरूक

    बढ़ते सड़क हादसों और यातायात अव्यवस्था को देखते हुए यातायात पुलिस लगातार सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चलाती है। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य हादसों में कमी लाना, नियम उल्लंघन पर अंकुश लगाना और लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक करना है।

    यातायात पुलिस विशेषकर कोहरे, और प्रदूषण के दौरान सघन चेकिंग कर रही है, ताकि तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, गलत लेन में चलना, शराब पीकर ड्राइविंग, बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट जैसे उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। यातायात पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख चौराहों, हाईवे और ब्लैक स्पाट्स पर गश्त और तैनाती बढ़ाई गई है।

    इसके अलावा वाहन के पीछे रिफ्लेक्टर, ब्रेक लाइट और इंडिकेटर न लगाने वाले व्यावसायिक वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रालियों पर भी चालान किए जा रहे हैं। इंटरनेट मीडिया, स्कूलों, कालेजों और आरडब्ल्यूए के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण हैं।

    "कोहरा सिर्फ मौसम की समस्या नहीं, बल्कि यातायात अनुशासन की भी परीक्षा है। यदि चालक जागरूकता और नियमों का पालन करें तो कोहरे में होने वाले हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। चालक कम गति से वाहन चलाएं, फाॅग लाइट का उपयोग करें, वाहन के सभी उपकरणों की समय पर जांच कराएं और सड़क पर अनावश्यक जोखिम लेने से बचें। आने वाले दिनों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

    -सत्यवीर कटारा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त यातायात

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