नई दिल्ली [रणविजय सिंह]।120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार। सुबह इच्छा हुई तो राजस्थान के अलवर जिले के नीमराना के ऐतिहासिक स्थलों का सैर की और फिर वापस दिल्ली। दिल्ली से फरीदाबाद व गाजियाबाद का सफर मिनटों में पूरा होगा।

जी हां, यह सब कुछ संभव होगा हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर से। मेट्रो ने एनसीआर में आवागमन को आसान बनाया है। अब हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर से परिवहन व्यवस्था को पंख लग जाएंगे। दिल्ली से पानीपत व मेरठ के बीच यह परियोजना एक से दो साल में धरातल पर आ जाएगी।

माना जा रहा है कि इससे एनसीआर की तस्वीर भी बदल जाएगी और शहरीकरण तेजी से बढ़ेगा। पहले फेज में हांगकांग मॉडल की तर्ज पर 381 किलोमीटर लंबे तीन हाई स्पीड कॉरिडोर का निर्माण होगा। इनमें दिल्ली-पानीपत, दिल्ली-मेरठ और दिल्ली-अलवर कॉरिडोर शामिल हैं।

हांगकांग की तर्ज पर विकसित होगा हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) प्रबंधन के अनुसार, हांगकांग में हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर परियोजनाएं काफी सफल रही हैं। कॉरिडोर के आसपास सुविधाओं के विकास से यह फायदे का सौदा साबित हुई हैं। इसलिए एनसीआरटीसी यहां भी वही मॉडल अपनाना चाहता है।

उल्लेखनीय है कि शहरी विकास मंत्रलय ने हाल में एनसीआरटीसी का स्थायी प्रबंध निदेशक नियुक्त कर दिया है। इसके बाद तेजतर्रार अभियंताओं और अधिकारियों की टीम तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है।

हाई स्पीड रैपिड रेल परियोजनाओं पर अमल के लिए एनसीआरटीसी की टीम में दिल्ली मेट्रो व भारतीय रेलवे के अनुभवी इंजीनियरों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद कॉरिडोर का फाइनल डिजाइन व भूमि अधिग्रहण का काम शुरू होगा।

एनसीआरटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस परियोजना का मकसद दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ परिवहन सुविधा विकसित करना ही नहीं, बल्कि व्यवस्थित और सुदृढ़ शहरी विकास भी है। इससे दिल्ली में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए आसपास के शहरों में बुनियादी व व्यवसायिक सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर को दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों से जोड़ा जाएगा।

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