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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया IIT कानपुर का मिशन, 9500 करोड़ का लक्ष्य; AI तकनीक में भारत बनेगा सुपरपावर

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:14 AM (IST)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईआईटी कानपुर के 'ग्रेटर दैन अस' अभियान का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य मार्च 2029 तक 9,500 करोड़ रुपये जुटाना है।

9,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। जागरण

9,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। जागरण

HighLights

  1. आईआईटी कानपुर का 9,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य।

  2. सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम तकनीक में आत्मनिर्भरता पर जोर।

  3. गौतम स्कूल ऑफ इनोवेशन के लिए 180 करोड़ रुपये का दान।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को भारत मंडपम में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का शुभारंभ किया। इसके तहत संस्थान ने मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डालर यानी करीब 9,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

किसी भी आईआईटी की ओर से शुरू किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा धन संग्रह अभियान है। खास बात यह है कि अभियान की औपचारिक शुरुआत से पहले ही पूर्व छात्रों, कंपनियों, दानदाताओं और सरकार की ओर से 4,155 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता मिल चुकी है।

राजनाथ सिंह ने कहा, महान संस्थानों के निर्माण में दशकों का समय लगता है। आईआईटी की स्थापना करने और उन्हें सशक्त बनाने वाली शुरुआती पीढ़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया।

विरासत को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी

उन्होंने केवल परिसर और प्रयोगशालाएं ही नहीं बनाईं, बल्कि उत्कृष्टता, सेवा और राष्ट्र-निर्माण की एक सशक्त संस्कृति भी विकसित की। इस विरासत को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। एक पीढ़ी नींव रखती है, अगली पीढ़ी उसे और मजबूत करती है, और उसके बाद आने वाली पीढ़ियां उसी विरासत के आधार पर नई ऊंचाइयां हासिल करती हैं।

देश में विकसित होंगी भविष्य की तकनीकें

आइआइटी कानपुर का यह अभियान केवल संस्थान के बुनियादी ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, एआइ, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

वहीं, अभियान के तहत अनुसंधान सुविधाओं के विकास, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन देने के साथ प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

इस अवसर पर संस्थान के पूर्व छात्र राहुल गौतम ने नोएडा परिसर में गौतम स्कूल आफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (जी-साइन) की स्थापना के लिए 180 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई। प्रस्तावित स्कूल में जुलाई 2027 से प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता में एमबीए कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। यहां एआइ, ड्रोन, जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उद्यमियों को तैयार किया जाएगा।

तीन स्तंभों पर खर्च होंगे 9 हजार करोड़

अभियान को फाउंडेशन, टैलेंट और फ्रंटियर तीन स्तंभों में बांटा गया है। फाउंडेशन के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत केंद्रीय अनुसंधान सुविधा, सेमीकंडक्टर केंद्र, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधा और छात्रावास विकसित किए जाएंगे। टैलेंट स्तंभ के लिए तीन हजार करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जबकि फ्रंटियर के लिए एक हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य है। फ्रंटियर के तहत अब तक 1,556 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता मिल चुकी है।

संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल के अनुसार, भारत भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता। अभियान का उद्देश्य ऐसी शोध क्षमता और उद्यमशीलता विकसित करना है, जिससे देश में ही नई तकनीकें, उत्पाद और डीप टेक कंपनियां तैयार हो सकें।