जासं, नई दिल्ली :

विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि देश को सुरक्षित बनाने के लिए निजी सुरक्षा एजेंसियों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन इन एजेंसियों की दक्षता बढ़ाने के लिए उन्हें न केवल अपने कौशल को बढ़ाना होगा बल्कि, एजेंसियों को नवीनतम सुरक्षा तकनीक से भी लैस करना होगा। तभी निजी सुरक्षा एजेंसियां भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगी। वे सेट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्यूरिटी इंडस्ट्री (सीएपीएसआइ) और एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डिटेक्टिव एंड इंवेस्टिगेटर्स की सालाना बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ भारत में निजी सुरक्षा की मांग बढ़ने के अलावा सुरक्षा एजेंसियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में चुनौतियां और खतरे में भी इजाफा हो रहा है। आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहतर प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी की जरूरत है। एजेंसियों को चाहिए कि वे इस कमी को पूरा करने के प्रति सजग रहें। बैठक में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने भी शिरकत की। उन्होंने बताया कि भारत में पुलिस और जनसंख्या के बीच काफी अंतर है। ऐसे में सरकार के लिए प्रत्येक को सुरक्षा प्रदान करना मुश्किल भरा कार्य है। ऐसी स्थिति में निजी सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका ज्यादा अहम हो जाती है। यही नहीं यह इंडस्ट्री सर्वाधिक नौकरी देने वाला क्षेत्र है। इसके लिए बेहतर नीतियां बनाए जाने की जरूरत है ताकि सुरक्षा के मामले में देश सशक्त हो सके। बैठक में देश भर के जासूस और निजी सुरक्षा एजेंसियों के लोग मौजूद थे। इस मौके पर सीएपीएसआइ के चेयरमैन कुंवर विक्रम सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र करीब 22 हजार निजी सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से 70 लाख नौकरी उपलब्ध करवा रहा है। वहीं, इसमें हर वर्ष 22 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी भी हो रही है। यह कॉरपोरेट टैक्स देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर भी है। इस सेवा में सबसे बड़ा मामला जीएसटी का है। सेवा लेने वालों की जगह सेवा देने वाली सुरक्षा एजेंसियों को जीएसटी का भुगतान करना पड़ रहा है। इस नियम से इंडस्ट्री तबाह होने की कगार पर है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दोनों बिंदुओं को खत्म करने की मांग भी की है।

Posted By: Jagran

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