विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'सपने बड़े देखें, पूरा करने में झोंक दें जान', SRCC में 'जेन जी' से बोले पीएम मोदी- भारत अब निराशा से नहीं, सामर्थ्य से भरा है

Published: Sun, 06 Sep 2026 06:41 AM (IST)

प्रधानमंत्री मोदी ने एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में जेन जी से संवाद करते हुए उन्हें विकसित भारत के लिए बड़े ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. पीएम मोदी ने SRCC में जेन ज़ी से संवाद किया।

  2. युवाओं को विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रेरित किया।

  3. 2013 की तुलना में भारत के सामर्थ्य पर बल दिया।

नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। कुछ समय पहले इंस्टाग्राम पर देर रात सेल्फी वीडियो पोस्ट कर जेन जी से सक्रिय संवाद की शुरुआत करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को युवा पीढ़ी के साथ संपर्क को नया आयाम प्रदान किया। अवसर था श्रीराम कॉलेज आफ कामर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह का जिसमें पीएम जेन जी से सीधे मुखातिब थे।

उन्होंने युवाओं को विकसित और आत्मनिर्भर भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य से जोड़ते हुए आह्वान किया कि वह सपने बड़े देखें और उन्हें पूरा करने में जान लगा दें। विकास के संकल्प की चर्चा में पीएम ने जेन जी की भाषा का भी खूब इस्तेमाल किया और ओजी (ओरिजिनल गैंग्सटर यानी पुराना खिलाड़ी) व धुरंधर जैसे शब्दों से संबोधन को विद्यार्थियों के निकट पहुंचाया।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ये केवल बातें नहीं हैं। उन्हें देश के युवाओं पर भरोसा है, उस भरोसे के आधार पर वह विकसित भारत का सपना पूरा होते देख रहे हैं। यह संकल्प है, जिसे सिद्धि में बदलने को लगातार काम हो रहा है। ग्लोबल लीडर बनने का आह्वानएसआरसीसी में मोदी 13 वर्ष बाद पहुंचे।

उन्होंने कार्यक्रम स्थल पहुंचने के लिए मेट्रो में यात्रा की। 2013 में वह गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर यहां आए थे, अब देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन युवा श्रोताओं से जुड़ने का अंदाज तब भी प्रभावी था, अब भी जोरदार रहा। पीएम के संबोधन का सार युवाओं को भ्रम व निराशा के बादल से निकालते हुए सकारात्मक और ऊर्जा से भरपूर विकसित हो रहे भारत के सपने से जोड़ना रहा।

मोदी ने एसआरसीसी की विरासत और अरुण जेटली जैसे उसके पूर्व छात्रों के योगदान को याद करते हुए युवाओं से ग्लोबल लीडर बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत सिर्फ छोटे लक्ष्य तय नहीं करता, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प के साथ मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट और स्पेस में सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ओलिंपिक की मेजबानी से लेकर भारत के अपने स्पेस स्टेशन तक के सपनों को उन्होंने देश के सामर्थ्य का संकल्प बताया।आधे भरे ग्लास का उदाहरण देकर विपक्ष को घेरामोदी ने विपक्ष को भी कठघरे में खड़ा किया।

उन्होंने एसआरसीसी में 13 वर्ष पुराने अपने प्रसिद्ध भाषण को याद करते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार में पालिसी पैरालासिस से लेकर आज के तेजी से बढ़ते भारत के बीच की खाई को स्पष्ट किया और याद दिलाया कि 2013 में जब उन्होंने इसी मंच से देश के युवाओं से संवाद किया था, तब देश उच्चतम महंगाई दर, घोटालों और विदेशी आर्थिक संस्थाओं द्वारा फ्रेजाइल फाइव में गिने जाने जैसी निराशा से जूझ रहा था।

तब देश के मीडिया की हेडलाइंस में सीमा पार से घुसपैठ, हेलीकाप्टर खरीद में घूसखोरी और बम धमाकों की खबरें छाई रहती थीं। मोदी ने कहा, एक वो दिन था जब हर मोर्चे पर, देश में संघर्ष ही संघर्ष था और एक आज का दिन है, आज आतंकवाद फैलाने वाले पस्त पड़े हैं। पाकिस्तान कोई नापाक हरकत करता है, तो भारत की सेनाएं घर में घुसकर मारती हैं।

जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक शांति बढ़ी है। माओवादी आतंक, नक्सलवाद की कमर तोड़ दी गई है। व्यापार में अड़चनों और युद्ध के समय में 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना भारत की सामर्थ्य को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने इसी मंच से 2013 के संबोधन में आधे भरे ग्लास वाले प्रसिद्ध दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि जहां कुछ राजनीतिक वर्गों के लिए देश का ग्लास आज भी आधा खाली ही है, वहीं उनकी सरकार ने हमेशा भारत के सामर्थ्य को पूरा भरा देखा है।

मोदी ने कहा कि मैं ग्लास को पूरा भरा देखता हूं। पीएम ने 2013 में कहा था कि कुछ लोगों को ग्लास पानी से आधा भरा दिखता है, कुछ को आधा खाली दिखता है। तीसरे ऐसे होते हैं जिन्हें ग्लास पूरा भरा दिखता है- आधा पानी और आधा हवा से भरा। माई-बाप संस्कृति की बातपीएम मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों में माई-बाप संस्कृति पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक देश की गरीब और सामान्य जनता को बैंकिंग और बुनियादी सुविधाओं से दूर रखकर राजनीतिक निर्भरता बनाए रखी गई।

12 वर्ष पूर्व शुरू की गई जनधन योजना का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि 60 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोलकर इस व्यवस्था को ध्वस्त किया गया, जिसने आज भारत की ऐतिहासिक फिनटेक क्रांति की नींव रखी है। राजनीतिक रूप से बेहद अहम इस भाषण में पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का मजाक उड़ाने वाले आलोचकों को करारा जवाब दिया। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि कभी मोबाइल और रक्षा उपकरणों के भारी आयात पर निर्भर रहने वाला भारत आज ढाई लाख करोड़ रुपये के स्मार्टफोन निर्यात कर रहा है और रक्षा उत्पादन दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

नाराज फूफा, दिमागी नक्सली और होम्योपैथी की गोली देश के विकास कार्यों का विरोध करने वाली ताकतों पर हमला बोलते हुए मोदी ने नाराज फूफा, दिमागी नक्सली और होम्योपैथी की गोली जैसे राजनीतिक रूप से चुटीले तंज का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे केदारनाथ आपदा हो, 2008 का मुंबई हमला हो या कुछ और, पिछली सरकारों का दृष्टिकोण आत्मसमर्पण का था, जबकि आज का भारत हर वैश्विक-आंतरिक चुनौती का डटकर मुकाबला करता है।

भारत के लिए जो जरूरी होगा, वह करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे नाराज फूफा को नहीं रोका जा सकता। 15 अगस्त पर ऐसे लोगों (विपक्ष) के लिए होम्योपैथिक की गोली दी थी। होम्योपैथिक का स्वभाव ऐसा है कि जब शुरू करते हैं तो बीमारी एकदम से बढ़ जाती है। तो लालकिले से एक गोली दी, तो जैसा होम्योपैथिक का स्वभाव सारे दिमागी नक्सली वाले निकल-निकल कर बाहर आने लगे। जनता अब उनका असली रंग देख रही है।

यह भी पढ़ें- 'दिमागी नक्सल होम्योपैथिक की गोली थी, सब बाहर निकलकर आ गए'; PM ने विपक्ष को बताया नाराज फूफा