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    पटियाला हाउस कोर्ट ने ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ को मान्यता दी, मीडिया और गूगल को पुराने कंटेंट हटाने का आदेश

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 10:21 PM (IST)

    पटियाला हाउस कोर्ट ने 'राइट टू बी फॉरगॉटन' को मान्यता देते हुए मीडिया और गूगल को पुराने ऑनलाइन कंटेंट हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि व्यक्तियों को यह अधिकार है कि उनके बारे में पुरानी जानकारी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाया जाए। यह फैसला निजता के अधिकार और सूचना की सार्वजनिक उपलब्धता के बीच संतुलन स्थापित करता है। कोर्ट ने गूगल और मीडिया संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे उन कंटेंट को हटाएं जो अब प्रासंगिक नहीं हैं।

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    'राइट टू बी फॉरगॉटन' को मान्यता दी।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एक व्यक्ति के राइट टू बी फारगाटन (भुला दिए जाने के अधिकार) को मान्यता देते हुए मीडिया संस्थानों, गूगल और सर्च प्लेटफार्म इंडिया कानून को उसके खिलाफ प्रकाशित सभी पुराने ऑनलाइन कंटेंट हटाने और डी-इंडेक्स करने का निर्देश दिया है।

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    यह मामला मोसर बेयर मनी लांड्रिंग मामले से जुड़ा है, जिसमें संबंधित व्यक्ति बाद में बरी हो चुका है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने कहा कि डिजिटल जानकारी की स्थायित्व और इंटरनेट पर उसकी आसान उपलब्धता व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है, जबकि वह अब किसी भी आरोप का सामना नहीं कर रहा।

    बताया जनहित के विरुद्ध 

    अदालत ने कहा कि मुकदमे से मुक्त होने के बाद किसी व्यक्ति के बारे में ऑनलाइन उपलब्ध ऐसी जानकारी न तो जनहित में है और न ही उसका कोई औचित्य है। इसका उद्देश्य सिर्फ उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना रह जाता है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को अंतरिम आदेश जारी करते हुए संबंधित सभी लिंक ब्लाक या डिलीट करने को कहा।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मोसर बेयर मामले में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया था, पर अदालत ने बाद में उन्हें बरी कर दिया। इसके बावजूद इंटरनेट पर मौजूद पुरानी खबरें आज भी उन्हें आरोपित के तौर पर दिखा रही थीं, जिससे उनकी पेशेवर और सामाजिक छवि लगातार प्रभावित हो रही थी।

    कुछ मीडिया संगठनों ने दलील दी कि मामला सीमाबद्धता से बाधित है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के दायरे में आता है, हालांकि अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार कर दिया।