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सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं नोएडा की डीएम मेधा रूपम, NSA के तहत छात्रा को हिरासत में लेने पर HC ने लगाई थी फटकार

Published: Sun, 13 Sep 2026 03:47 PM (IST)

गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत एक छात्रा की हिरासत पर इलाहाबाद हाई ...और पढ़ें

गौतम बुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम।

गौतम बुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम।

HighLights

  1. डीएम मेधा रूपम ने हाई कोर्ट की फटकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

  2. हाई कोर्ट ने NSA हिरासत रद्द कर 5 लाख मुआवजे का आदेश दिया।

  3. मुआवजे की राशि डीएम और पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत एक छात्र को हिरासत में लेने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से फटकार मिलने के बाद गौतम बुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा फटकार लगाने व छात्रा आकृति चौधरी को लेकर दिए फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छात्र को हिरासत लेने के मामले की सुनवाई करते कहा था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का मूल अधिकार है। यह शासन के लिए ‘सेफ्टी वाल्व’ की तरह काम करता है, जिसे मनमाने ढंग से दबाया नहीं जा सकता।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण स्वीकार करते हुए की थी।

छात्रा पर लगा एनएसए भी रद

इलाहाबाद कोर्ट ने नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के वेतन वृद्धि आंदोलन से जुड़े मामले में छात्रा पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून भी रद कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस की कहानी में बड़ा विरोधाभास पाया।

दरअसल, पुलिस ने 11 अप्रैल 2026 को आकृति चौधरी को हिरासत में लिया था, जबकि नोएडा में हिंसा और आगजनी की घटना 13 अप्रैल 2026 को हुई थी। पीठ ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति पहले से हिरासत में है, वह बाद की हिंसा के लिए जिम्मेदार कैसे हो सकता है? कोर्ट ने कहा कि पुलिस गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या वीडियो नहीं पेश कर सकी।

इलाहाबाद कोर्ट ने की थी टिप्पणी

इस मामले में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद टिप्पणी की थी कि कड़े निवारक कानूनों का इस्तेमाल सामान्य जमानत रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। बिना पुख्ता सबूत के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला हुआ तो अदालतें मूकदर्शक नहीं रहेंगी।

शुरुआती रिपोर्ट तैयार

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को याची को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि जनता के खजाने से नहीं जाएगी। यह राशि जिलाधिकारी और शुरुआती रिपोर्ट तैयार करने वाले थाना प्रभारी सहित जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी।

5 लाख मुआवजा देने का आदेश 

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को याची को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि मुआवजे की यह राशि जनता के खजाने यानी सरकारी कोष से नहीं दी जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की पूरी रकम की वसूली मामले में लापरवाह रहे जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से की जाएगी। इसमें संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारी (DM) और शुरुआती एफआईआर व रिपोर्ट तैयार करने वाले थाना प्रभारी (SO/SHO) समेत अन्य दोषी पुलिसकर्मी शामिल हैं।

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