जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) चुनाव में वामपंथी संगठन डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) ने लगातार चौथी बार अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है। डीटीएफ के प्रत्याशी राजीब रे ने नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) के वीएस नेगी को 261 वोट से हराया। तीसरे स्थान पर एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट (एएडी) और यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) गठबंधन के नेता एसएस राणा थे। शुक्रवार देर रात लगभग ढाई बजे चुनाव परिणाम घोषित किया गया। परिणाम को लेकर उत्सुकता इतनी ज्यादा थी कि शिक्षक बारिश के बाद भी आर्ट फैकल्टी के बाहर डटे रहे।

जीत से उत्साहित राजीब रे का कहना है कि शिक्षकों ने एक बार फिर डीटीएफ पर भरोसा जताया है। हम शिक्षकों के मुद्दों को पहले की तरह उठाएंगे। शिक्षा के निजीकरण, स्वायत्तता और नियुक्ति के मुद्दों पर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। वहीं वीएस नेगी का कहना है कि तदर्थ शिक्षकों का विश्वास अभी एनडीटीएफ से जुड़ नहीं पाया है। इस बार भी मामूली वोट से हारने की बड़ी वजह यह है कि तदर्थ शिक्षकों का पूरा समर्थन नहीं मिला। एक तरफ तो तदर्थ शिक्षक इस संगठन को सरकार का प्रतिनिधि मानते हैं, वहीं जब समर्थन की बात हो तो वे दूरी बना लेते हैं। हार के बावजूद मैं संघर्ष करता रहूंगा। जो नीतियां शिक्षकों के हित में नहीं हैं, उनके खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2015 के डूटा चुनाव में वीएस नेगी नंदिता नारायण से मात्र 222 वोट से हारे थे, इस बार राजीब रे से वह 261 वोट से हारे हैं।

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डूटा चुनाव में 9682 वोट में से 7386 अध्यक्ष पद के लिए पडे़। इनमें से 2636 वोट डीटीएफ के उम्मीदवार राजीब रे को, 2375 वोट एनडीटीएफ के प्रत्याशी वीएस नेगी को और 1930 वोट एएडी और यूटीए गठबंधन के उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह राणा को मिले।

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377 मत पड़े अवैध

डूटा चुनाव में 377 वोट अवैध घोषित किए गए, जबकि हार-जीत का अंतर इससे भी कम वोट से हुआ।

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