बवाना स्कूल यौन शोषण मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, दिल्ली पुलिस से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बाहरी उत्तरी दिल्ली के बवाना में तीन वर्षीय छात्रा के यौन शोषण मामले में स्वत: संज्ञान ...और पढ़ें
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यौन शोषण के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। AI जनरेटेड
HighLights
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बवाना मामले में स्वत: संज्ञान लिया।
दिल्ली पुलिस से सात दिन में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।
आरोपी बस चालक गिरफ्तार, POCSO के तहत कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। बाहरी उत्तर दिल्ली के बवाना इलाके के एक निजी स्कूल में तीन वर्षीय नर्सरी छात्रा के कथित यौन शोषण के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है।
आयोग ने दिल्ली पुलिस से मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई करने को कहा है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर मामले की जल्द जांच, आरोपित से हिरासत में पूछताछ और पाक्सो तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षित रखने के निर्देश
आयोग ने आरोपित के जब्त मोबाइल फोन और उसमें मौजूद वीडियो की जांच कराने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं अन्य बच्चे भी उसके निशाने पर तो नहीं आए। साथ ही स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और कर्मचारियों के सत्यापन में संभावित चूक की भी जांच करने को कहा गया है।
मुआवजा उपलब्ध कराने पर जोर
आयोग ने पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा, विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक परामर्श, कानूनी सहायता और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग पुलिस से सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है, जिसमें जांच की प्रगति, फोरेंसिक निष्कर्ष, आरोपपत्र दाखिल करने की समय सीमा और स्कूल स्तर पर जवाबदेही तय करने के कदमों का विवरण देना होगा।
पुलिस के मुताबिक, घटना 19 अगस्त को सामने आई, जब बच्ची के परिवार ने उसके निजी अंगों पर चोट के निशान देखे। पूछताछ में बच्ची ने स्कूल के एक व्यक्ति के बारे में बताया, जो उसे चॉकलेट देता था। 24 अगस्त को स्कूल की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने पर बच्ची ने आरोपित की पहचान की।
पुलिस ने स्कूल के बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है। आयोग ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
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