नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। यमुना नदी में प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी के दिशानिर्देशों के तहत पूजा सामग्री प्रवाहित करने पर पूरी तरह से रोक लगी है। इसके बावजूद लोग नवरात्र के समापन के बाद नदी में मां दुर्गा की मूर्तियां विसर्जित करते और पूजन सामग्री प्रवाहित करते नजर आए। लोग यमुना पुल पर खड़े होकर पालीथिन में माता की चुनरी, फूल माला, अगरबत्ती के खाली डिब्बे और अन्य पूजन सामग्री डाल रहे थे।

हालांकि, पुलिस बल भी तैनात था, लेकिन लोग बेखौफ होकर यमुना पुल की जालियों के बीच से पूजन सामग्री को डालते दिखे। पुल के किनारे पूजन सामग्री का ढेर लग गया है। इससे पुल पर गंदगी फैल रही है। इसके अलावा नदी में दूर-दूर से प्लास्टिक की थैलियां बहतीं नजर आ रही थीं। यमुना पुल पर जगह-जगह पूजा सामग्री और हवन सामग्री न डालने की चेतावनी के बोर्ड लगे हैं, वहीं कई फीट ऊंची जाली भी लगी है। इसके बावजूद लोग नियमों की अनदेखी कर नदी को दूषित करते दिखे।

यमुना पुल पर तैनात पुलिस बल लोगों को पूजा सामग्री डालने से बार-बार मना कर रहा था। फिर भी लोग यमुना खादर के रास्ते और पुल की टूटी जाली के बीच से चोरी-छिपे पूजन सामग्री डाल रहे थे। यमुना पुल में पूजन सामग्री डाल रहे बच्चों और महिलाओं ने बताया कि वे लोग आसपास ही रहते हैं और पूजा सामग्री डालने के पैसे लेते हैं।

राहगीरों ने बताया कि आसपास झुग्गियों में रहने वाले लोग पुल की जालियों को तोड़ देते हैं। इससे लोग यहां पूजन सामग्री डालने पहुंचते हैं। लोगों को भी सोचना चाहिए नौ दिन मां दुर्गा की पूजा करते हैं। उसके बाद पूजा सामग्री को नदी में फेंक देते हैं। यह बहुत दुखद है कि एक तरफ सरकार यमुना की सफाई के लिए अभियान चला रही है और दूसरी ओर लोग पवित्र नदी को दूषित कर रहे हैं।

वहीं, एक अन्य राहगीर पंकज ने बताया कि पूजन सामग्री डालने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और नदी में सामग्री फेंकने वाले बच्चों को हटाना चाहिए। यही लोग पुल पर लगी जालियों को तोड़ते हैं। अगर ये लोग नहीं रहेंगे तो यहां प्रशासन की चौकसी से कोई नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को भी समझना होगा कि इससे नदी प्रदूषित हो रही है। हमें पर्यावरण को बचाना चाहिए।

Edited By: Prateek Kumar