नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। गुटबाजी में उलझी कांग्रेस में दिल्ली के नए अध्यक्ष पर सर्वसम्मति बनना तो मुश्किल है, लेकिन नया नाम इसी सप्ताह घोषित हो जाने की संभावना है। नए अध्यक्ष की खोज भी सोमवार से ही प्रारंभ हो जाएगी। नए अध्यक्ष की घोषणा के बाद तीनों कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे या नहीं, कहना जल्दबाजी होगी। अलबत्ता, सभी ब्लॉक समितियां भंग करने एवं 14 जिला व 280 ब्लॉक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के विवादित फैसलों में बदलाव लगभग तय है।

विधानसभा चुनावों में बहुत कम समय शेष रह जाने के कारण आलाकमान अब ढिलाई नहीं बरतना चाहते। इसीलिए प्रदेश कांग्रेस की कमान को लेकर चर्चा तेज है। पार्टी इस बार ऐसे नेता को कमान थमाना चाह रही है जो न केवल सभी को साथ लेकर चले बल्कि विधानसभा चुनाव में संगठन को भी मजबूत कर सके। फिलहाल जो नाम सामने आ रहे हैं उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, सुभाष चोपड़ा, अरविंदर सिंह लवली और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री शामिल हैं।

हालांकि प्रदेश के तीनों कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोठिया भी दौड़ में हैं, लेकिन प्रदेश की गुटबाजी से यह तीनों बचे नहीं रह सके हैं। कहने को प्रदेश संभालने का दम पांच बार के विधायक जयकिशन और लंबे समय से नगर निगम की सत्ता पर काबिज मुकेश गोयल भी भर रहे हैं, किन्तु आलाकमान इनके नाम पर कितना विचार करते हैं, कहा नहीं जा सकता। चर्चा तो अजय माकन को लेकर भी है, लेकिन कुछ ही माह पूर्व स्वयं इस्तीफा देने के कारण उनके नाम पर सर्वसम्मति बन पाना सहज नहीं है।

अजय माकन के इस्तीफे के बाद शीला को मिली थी दिल्ली के कमान

यह अलग बात है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव-2015 में हार के बावजूद राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए रखा था, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले जब उन्होंने इस्तीफा दिया तो शीला दीक्षित ने यह जिम्मेदारी संभाली। इसमें उनके साथ राजेश लिलोठिया, हारुन यूसुफ और देवेंद्र यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। 

यह अलग बात है कि उस समय 80 साल की शीला दीक्षित को दिल्ली का नया चीफ बनाने पर काफी आलोचना भी हुई थी, लेकिन शीला ने लोगों को गलत साबित किया। दरअसल, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही हार गई, लेकिन पार्टी तीसरे स्थान से उठकर दूसरे पर पहुंच गई। कांग्रेस को 21 फीसदी वोट मिले और दिल्ली की 7 में से 6 सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों को आम आदमी पार्टी से ज्यादा वोट मिले।

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Posted By: JP Yadav