नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा कोरोना के दोनों डोज टीके लेने के बाद मास्क नहीं पहनने का दिशा निर्देश जारी किए जाने के बाद यहां भी डाक्टरों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि देश में डाक्टर विभिन्न बीमारियों के इलाज में अमेरिका के नियामक एजेंसियों व चिकित्सा संगठनों द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन करते रहे हैं। लेकिन इस बार यहां के डाक्टरों ने सीडीसी के दिशा निर्देश से सहमत नहीं हैं।

यदि साल के अंत तक देश में सभी लोगों को दोनों डोज टीका लग भी जाए तब भी मास्क का इस्तेमाल जारी रखना होगा। कोरोना की दूसरी लहर के बाद किसी तरह का जोखिम उठाना उचित नहीं होगा।

लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक डा. अरविंद कुमार ने कहा कि सीडीसी के दिशा निर्देश को यदि ध्यान से पढ़ें तो उसमें लिखा है कि दोनों डोज टीका ले चुके लोग टीकाकरण के दो सप्ताह बाद मास्क पहनना व शारीरिक दूरी के नियम का पालन बंद कर सकते हैं लेकिन किसी कारण संबंधित क्षेत्र में मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है तो यह दिशा निर्देश लागू नहीं होता। लिहाजा अमेरिका में भी 56 में से 34 राज्यों में अब भी मास्क पहनना अनिवार्य है। फिर भी यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। वहां भी अभी तक 60 फीसद लोगों को टीका नहीं लगा है। वहां करीब 40 फीसद आबादी को टीका लगा है।

सीडीसी द्वारा जारी दिशा निर्देश का एक कारण यह हो सकता है कि जो टीके वहां लगा जा रहे हैं उसे 95 फीसद तक कारगर होने का दावा किया गया है। लेकिन जन स्वास्थ्य और भारत के संदर्भ में देखें तो कम से कम इस साल मास्क पहनने के प्रावधान में किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती है।

केंद्र सरकार ने हाल में बताया है कि अगस्त से दिसंबर के बीच सबको टीका लग जाने की उम्मीद है। यदि टीका लग भी गया तब भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनना, शारीरिक दूरी व नियमित हाथ धोना जरूरी है। इसलिए सीडीसी के दिशा निर्देश का भारत के संदर्भ में कोई महत्व नहीं है। अमेरिका की आबादी महज 33 करोड़ है। जबकि भारत की आबादी 130 करोड़ है। अभी देश में करीब तीन फीसद आबादी को ही दोनों डोज टीका लगा है। इसलिए दोनों देशों की परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न है।

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया के चेयरमैन और कोरोना पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) द्वारा गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य डा. के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि अमेरिका में अभी हालात पहले से बेहतर है। वहां फाइजर व माडर्ना के जो टीके लग रहे हैं वह ज्यादा प्रभावी भी है। इस वजह से वहां यह फैसला लिया गया है लेकिन यहां हालत अलग है।

एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने अपने एक बयान में कहा है कि कोरोना वायरस अक्सर म्युटेशन देखे जा रहे हैं। नए स्ट्रेन पर टीका कितना कारगर है अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वायरस में होने वाले म्युटेशन को ध्यान में रखते हुए मास्क का इस्तेमाल व शारीरिक दूरी के नियम का पालन जरूरी है। डा. के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि भारत में इस्तेमाल हो रहे टीके नए स्ट्रेन पर भी 50 फीसद तक कारगर बताए जा रहे हैं लेकिन अगले कुछ समय बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा। इसलिए दोनों डोज टीका लगने के बाद भी मास्क का इस्तेमाल जारी रखना होगा।

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