नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली में गर्मी का तेवर तल्ख होता जा रहा है। आलम यह है कि सुबह 10 बजे से लेकर दिन के 2 बजे तक गर्मी से लोग तरबतर हो जा रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि अगले दो दिनों तक इसी तरह से तपिश और गर्म हवाओं का का प्रकोप रहेगा। शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री ज्यादा के साथ 40.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री ज्यादा 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। हवा में नमी का अधिकतम स्तर 44 फीसद रहा, तो न्यूनतम स्तर 19 फीसद दर्ज हुआ।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक गर्म हवा चल सकती है। इसके बाद दिल्ली में 30 अप्रैल के आसपास 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय होगा। इसके 29 अप्रैल तक सक्रिय होने की संभावना है। जिसके बाद दिल्ली की तरफ चक्रवाती हवा भी आएगी। इससे दिल्ली के मौसम में परिवर्तन आने की संभावना है। इससे दिल्ली में 30 अप्रैल से एक मई के दौरान बादल और हल्की बारिश होने की उम्मीद बन सकती है।

दिल्ली में दो दिन तक प्रदूषण का स्तर रहेगा सामान्य पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रोजेक्ट सफर में दिल्ली का औसत पीएम 2.5 का स्तर 64 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) दर्ज हुआ। वहीं रविवार को पीएम 2.5 का स्तर 58 एमजीसीएम दर्ज हो सकता है। इसके बाद सोमवार को यह 71 एमजीसीएम तक रह सकता है।

सफर के अनुसार, अगले दो दिनों तक खतरनाक स्तर पर प्रदूषण के पहुंचने की उम्मीद नहीं है। यह इसी तरह से सामान्य स्तर के आस पास ही रहेगा। पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 एमजीसीएम होता है।  

उफ! 43 डिग्री तक पहुंच गया पारा

गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। दिन में जबरदस्त गर्मी रही, हालांकि दोपहर तेज हवाएं भी चलीं, लेकिन गर्मी का असर बरकरार रहा। लोगों ने घर से बाहर निकलते समय एहतियात बरती। लोग सिर व मुंह ढक कर घर से बाहर निकले तो किसी ने छतरी का सहारा लेकर गर्मी से बचाव करने की कोशिश की। शीतल पेय पदार्थों का लोगों ने सहारा लिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में जलजनित बीमारियां पनपने लगती हैं। ऐसे में खान-पान में एहतियात बरत कर काफी हद तक बीमारियों से बचा जा सकता है।

डॉ. अरविंद मिंज ( सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन विभाग, सर्वोदय अस्पताल, फरीदाबाद) के मुताबिक, गर्मी में उल्टी-दस्त, हैजा, पीलिया और टाइफाइड के मामले आते हैं। इन बीमारियों के पनपने का मुख्य कारण जल में उत्पन्न होने वाले जीवाणु व कीटाणु होते हैं। कई बार खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर मक्खी आ कर बैठ जाती हैं। ऐसे में खुले में रखे इन खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट में संक्रमण हो सकता है। जब हम तेज गर्मी में घर से बाहर चलते हैं, तो उससे भी कई बार शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इन दिनों ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। 

डॉ. गुलशन अरोड़ा (मुख्य चिकित्सा अधिकारी, फरीदाबाद) का कहना है कि सरकारी अस्पताल की ओपीडी में जलजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। बादशाह खान अस्पताल की ओपीडी में रोजाना दो हजार मरीज आ रहे हैं। इनमें से बुखार, त्वचा एलर्जी और जलजनित बीमारियों के 250 से ज्यादा मरीज हैं। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। जरूरत है तो लोगों को जागरूक होने की। डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें।

स्वस्थ रहने के लिए बन बातों पर भी दें ध्यान

  • जलजनित रोगों से बचने के लिये स्वच्छ जल अथवा पानी को उबालकर और छानकर ठंडा करके पीना चाहिए।
  • गर्मी में पाचन क्रिया ठीक रखने को भोजन में घी-तेल का कम से कम उपयोग करें।
  • कच्ची बर्फ से बने कई पदार्थों में हानिकारक रसायन का उपयोग होता है, इनके सेवन से बचें।
  • गर्मी में बाहर से जब घर आते हैं, तो एकदम से ठंडे पानी या पेय पदार्थ न लें।
  • इससे गले में संक्रमण, दर्द, खराश, जुकाम या एलर्जी हो सकती है।

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