नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। राजधानी में बिजली की नई दरें घोषित होने का इंतजार है। बिजली की दरों को लेकर आम जनता, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों आदि से सुझाव लेने के लिए 12 और 13 मई को आनलाइन जनसुनवाई हुई थी।

बिजली वितरण कंपनियां (डिस्काम) बिजली की दरें बढ़ाने की, जबकि आम उपभोक्ता राहत की मांग कर रहे हैं। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) बिजली की दरें तय करता है। जनसुनवाई के बाद माना जा रहा था कि जून के पहले सप्ताह में नई दरें घोषित हो जाएंगी।

आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों और अन्य संगठन बिजली के स्थायी शुल्क कम करने और पेंशन ट्रस्ट अधिभार समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षो से बिजली की दरें तो नहीं बढ़ी हैं, लेकिन स्थायी शुल्क, पेंशन ट्रस्ट अधिभार और अन्य शुल्क बढ़ा दिया गया है जिससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ रहा है।

भाजपा भी स्थायी शुल्क कम करने की मांग कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता का कहना है कि दिल्ली में अधिकतम मांग सात हजार मेगावाट के आसपास है। इसके आधार पर स्थायी शुल्क लिया जाना चाहिए, लेकिन इससे कई गुना ज्यादा शुल्क वसूली जा रही हैं। इसमें कमी करने के साथ ही अबतक वसूली गई ज्यादा राशि उपभोक्ताओं को वापस किया जाना चाहिए।

Edited By: Geetarjun Gautam