मुरादनगर [दीपक कुमार]। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के कस्बा कसपारी में छिपे तीन पाकिस्तानी आतंकियों को भारतीय सेना के जवानों ने घेर लिया था। अपने को घिरा देख आतंकियों ने भारतीय सेना पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई से घबराकर तीनों आतंकी वहां से भाग गए और एक खंडहरनुमा मकान में जा छिपे। भारतीय जांबाजों ने उनका पीछा किया।

आतंकियों का किया पीछा 

राष्ट्रीय राइफल्स में गनर के पद पर तैनात विनोद कुमार अपने साथियों के साथ उस मकान में पहुंचे, जहां आतंकी छिपे थे। जाते ही उन्होंने एक को ढेर कर दिया। इसी दौरान एक गोली विनोद (24) के गले में लगी। इस हालात में भी उन्होंने दूसरे आतंकी को ढेर कर दिया और देश की सेवा करते-करते शहीद हो गए।

शुरू हुई आतंकियों की तलाश

सुठारी गांव निवासी विनोद 12वीं की पढ़ाई के दौरान सेना में शामिल हो गए थे। 20 वर्ष में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में थी। जून की रात विनोद व उनके साथियों को आर्मी हेडक्वार्टर से सूचना मिली कि कसपारी कस्बे में तीन आतंकी छिपे हुए हैं। इसके बाद विनोद 10-12 साथियों के साथ आतंकियों की तलाश में जुट गए। पूरी रात भारतीय सेना के जांबाजों ने उन्हें तलाश किया। अगली सुबह करीब चार बजे आतंकियों के ठिकाने का पता चल गया। भारतीय जवानों ने बिना देर किए उन पर फायरिंग शुरू कर दी।

गोली लगने के बाद भी दूसरे आतंकी को किया ढेर 

मुठभेड़ के दौरान अपने आपको घिरा देख तीनों आतंकी वहां से भाग निकले और खंडहरनुमा मकान में जाकर छिप गए। विनोद साथियों के साथ पीछा करते हुए वहां पहुंचे और एक आतंकी के सीने में गोलियां उतार दीं। इसी बीच दूसरे आतंकी ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में एक गोली विनोद के गले में लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंतिम सांस लेने से पहले अपनी गोली से उसे भी ढेर कर दिया। तीसरे आतंकी ने ग्रेनेड से हमला कर भागने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय जांबाजों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। पैतृक गांव सुठारी में तीन जुलाई को राजकीय सम्मान के साथ विनोद कुमार को अंतिम विदाई दी गई।

भाई भी हैं सेना में

विनोद का जन्म मुरादनगर के सुठारी गांव में 20 नवंबर 1978 को हुआ था। उनके छोटे भाई सुबोध कुमार सेना में हैं और वर्तमान में बतौर सिपाही झारखंड में तैनात हैं। उनसे छोटे भाई प्रमोद कुमार दिल्ली में कस्टम विभाग में इंस्पेक्टर हैं। सबसे छोटे भाई आमोद कुमार पढ़ाई पूरी कर पैकिंग का बिजनेस कर रहे हैं। विनोद कुमार की रगों में बचपन से ही देशप्रेम की भावना बह रही थी। उनके पिता नेपाल सिंह भारतीय सेना से नायक के पद से रिटायर्ड हुए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में तीन युद्ध लड़े।

भारत मां की सेवा करते हुए कुर्बान हो गया

विनोद की मां पुष्पा देवी ने बताया कि उनके पति अपने चारों बेटों को चीन व पाकिस्तान से हुए युद्ध के किस्से सुनाते थे। इन्हीं किस्सों से प्रेरणा लेकर विनोद ने पिता के नक्शे कदम पर चलने की ठानी और सेना में भर्ती हुए। विनोद के अंदर साहस बहुत ज्यादा था। वह चाहते थे कि वह देश के लिए सेवा करें और हुआ भी ऐसा। सेना में भर्ती होने पर उनके चेहरे पर खुशी आ गई थी। पिता नेपाल सिंह कहते हैं कि मेरा बेटा भारत मां की सेवा करते हुए कुर्बान हो गया, इससे ज्यादा गौरव की बात और क्या हो सकती है। मेरा बेटा सच्च देशभक्त और कर्मयोगी था। 

Posted By: Amit Mishra