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नई दिल्ली, जेएनएन। उन्नाव कांड से जुड़े दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में बृहस्पतिवार को तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई हुई। सीबीआइ ने अदालत को बताया कि पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के मामले में गलत फंसाया गया था। पुलिस से मिलीभगत कर आरोपितों ने उनसे हथियार की बरामदगी करवाई थी। पुलिसकर्मियों और आरोपितों के बीच इस दौरान मोबाइल फोन पर हुई बातचीत का डाटा भी उपलब्ध है।

इस मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित अन्य आरोपित हैं। सीबीआइ ने अदालत में कहा कि पीड़िता के पिता को भीड़ ने पीटा था, जिसके कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी। उन्हें पहले बुरी तरह पीटा गया था और उनके कपड़े फाड़ दिए गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ पुलिस को मोबाइल फोन पर शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ता ने कुलदीप सेंगर से भी तभी बातचीत की थी। पीड़िता के पिता पर केस दर्ज होने के बाद बातचीत बंद हो गई।

वहीं, बचाव पक्ष ने सीबीआइ के आरोप नकार दिए। पीड़िता के वकील धर्मेद्र कुमार मिश्रा ने अदालत में कहा कि पीड़िता के पिता की गिरफ्तारी से पहले बेरहमी से पिटाई हुई थी और उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। इसके बाद भी उन्नाव के सीएमओ (चीफ मेडिकल ऑफिसर) ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए फिट बताया और जेल में उनकी मौत हो गई थी। इसमें सीएमओ और आरोपितों की साजिश साफ नजर आती है। इसलिए सीएमओ पर भी केस दर्ज होना चाहिए।

मामले में जमानत पर चल रहे आरोपित उत्तर प्रदेश पुलिस के इंस्पेक्टर अशोक सिंह भदौरिया, एसआइ कामता प्रसाद पेश हुए। इनके अलावा कुलदीप सिंह सेंगर, शैलेंद्र सिंह उर्फ टिंकू सिंह, विनीत मिश्रा उर्फ विनय मिश्रा, बिरेंद्र सिंह उर्फ बौवा सिंह, राम शरण सिंह, शशि प्रताप सिंह और जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह को दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ जेल से लाकर अदालत में पेश किया।

दुष्कर्म मामले में शुक्रवार को तय हो सकते हैं आरोप
पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में शुक्रवार को तीस हजारी अदालत में आरोपितों पर आरोप तय हो सकते हैं। आरोप तय करने के लिए बहस लगभग पूरी हो चुकी है और कुछ हिस्सा शुक्रवार को सुना जाएगा। इसके बाद अदालत आरोप तय करने का आदेश दे सकती है।

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