नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। राम मंदिर के बाद अब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) देशभर के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की दिशा में गंभीरता से कदम उठा रही है। उसने इस मामले को आगे ले जाने को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति अक्टूबर से पूरे देश का भ्रमण कर इस मुद्दे पर आम सहमति के साथ माहौल तैयार करेगी। भ्रमण के दौरान समिति के लोग सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में जाएंगे। उनसे जुड़े लोगों, धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक लोगों से विचार- विमर्श करेंगे। इस भ्रमण के अनुभव के आधार पर तैयार रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंपते हुए उससे कानून मनाने की मांग की जाएगी।

विहिप के मुताबिक छह माह में यह रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। समिति का संयोजक विहिप के संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा को बनाया गया है। जबकि कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन, विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव व तिरुपति मंदिर के प्रबंधन से जुड़े रहे एलबी सुब्रमण्यम तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस समिति में शामिल हैं।

इसी वर्ष फरवरी में दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी में विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारियों व प्रमुख संतों की बैठक हुई थी, जिसमें इस विषय को आगे ले जाने का निर्णय किया गया था। वहीं, इसी वर्ष जुलाई में फरीदाबाद में आयोजित परिषद की प्रबंध समिति व प्रन्यासी मंडल की बैठक में विहिप ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए दो प्रस्ताव भी पारित किए थे।

विहिप इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि सरकारी नियंत्रण की स्थिति में इनके संचालन के लिए राज्य सरकारों द्वारा बनाई जा रहीं समितियों में गैर हिंदुओं को शामिल किया जा रहा है। इसी तरह मंदिर के धन का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए दूसरे धर्म के लोगों पर खर्च किया जा रहा है। कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मठ-मंदिर न केवल आस्था, बल्कि हिंदू समाज की आत्मा हैं। इन्हें सरकारी नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि विहिप इस विषय को परिणति तक पहुंचाने में सफल होगी।

Edited By: Mangal Yadav