जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर को तोड़ने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार व सिविक एजेंसियां आगे की कार्रवाई में जुट गई है। इसके विरोध में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ता शनिवार रात से ही मौके पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। मंदिर को बचाने के लिए समाज के लोग विहिप के नेतृत्व में मौके पर काफी संख्या में जुटे हुए हैं।

विहिप का कहना है कि हाईकोर्ट ने मंदिर का पक्ष सुने बिना ही उसको तोड़ने का आदेश पारित कर दिया। हम दिल्ली सरकार से अपील करते है मंदिर को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कल ही अपील पेटिंसन दायर करें अन्यथा हिन्दू समाज मंदिर पर हो रही कारवाही का प्रतिकूल जवाब देगा। 

बता देें कि शनिवार को इस संबंध में विहिप ने दिल्ली सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। इसे लेकर विहिप ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। यह पत्र उपराज्यपाल अनिल बैजल व उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर को भी भेजा गया है। पत्र में विहिप के प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने कहा कि चांदनी चौक के मुख्य मार्ग पर वर्ष 1974 में पीपल पेड़ के नीचे भगवान हनुमान स्वयंभू प्रकट हुए।

भक्तों ने वहां मंदिर बना दिया। वर्ष 1975 में दुर्गा व शंकर का मंदिर पीपल पेड़ के दूसरी तरफ बनाया गया। तभी से सभी के संज्ञान में यह मंदिर है। किसी ने भी आज तक आपत्ति नहीं की। वर्ष 2007 में दिल्ली उच्च न्यायालय में रिक्शा साइकल चालकों के जीवन निर्वाह के लिए मानुषी संगठन बनाम दिल्ली सरकार (नंबर 4572/2007) रिट याचिका दायर की गई। इसमें चांदनी चैक सर्व व्यापार मंडल ने हस्तक्षेप करके इस मंदिर को अवैध निर्माण बतलाते हुए तोड़ने की बात कहीं।

हाई कोर्ट ने बिना मंदिर को पार्टी बनाए और मंदिर का पक्ष सुने इस मंदिर को तोड़ने के आदेश दे दिए हैं। मंदिर के पुजारी को सरकार द्वारा बुलाया गया और बोला गया कि मंदिर फुटपाथ पर बना दिया जाए। वह फुटपाथ पर मंदिर को स्थानांतरित करने के लिए तैयार हो गए। न तो पंडितजी को मामले के बारे में बताया गया और न ही 2019 तक उन्हें दोबारा बुलाया गया।

2019 में धार्मिक समिति ने मंदिर के पंडित को बुलाया और कहा कि क्या मंदिर किसी दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है? उन्होंने किसी अन्य स्थान पर जाने से इनकार कर दिया। तब समिति ने हाई कोर्ट को लिखा कि मंदिर वहीं पर रहने दिया जाए। जिस आर्किटेक्ट ने 2016 और 2018 में अपने प्लान में मंदिर को वहीं रहने देने की सिफारिश की थी, उसने चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के दबाव में आकर कहा कि मंदिर हटना चाहिए। कोर्ट ने फैसला कर दिया कि मंदिर हटा दो। 

दिल्ली सरकार इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट गई और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार इस बारे में हाई कोर्ट में अपनी प्रार्थना लगाए, वहीं मामले को सुनेगी। वहीं, इस वर्ष 31 अक्टूबर को पंडित के पास मंदिर तोड़ने का नोटिस आया। पहली बार यह मालूम पड़ा कि मंदिर टूटने वाला है, क्योंकि मंदिर या पंडित को इसके पहले कभी पक्षकार नहीं बनाया गया। 3 नवंबर को मंदिर सेवा समिति ने हाई कोर्ट में अपनी अर्जी डाली, जिसे 20 नवंबर को खारिज कर दिया यह कहते हुए की दिल्ली सरकार हमारे पास आए।

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