नई दिल्‍ली [जागरण ब्‍यूरो]। कोरोना वायरस से निपटने की कठिन चुनौती हो या फिर चुनाव में हाथ की उंगुलियों में लगने वाली अमिट स्याही की खोज। हर मोर्चे पर अपने शोध व इनोवेशन के जरिये मदद पहुंचाने में 80 सालों से अनवरत प्रयासरत देश की प्रतिष्ठित संस्था वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research, CSIR) हरदिन कुछ नए कीर्तिमान को गढ़ने में जुटा है। सीएसआइआर ने हाल ही में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर यूवी (अल्ट्रा वायलेट) तकनीक ईजाद की है जो कोरोना वायरस को नष्ट करने में पूरी तरह से सक्षम बताई जा रही है।

फुलप्रूफ की गई संसद

फिलहाल इस तकनीक से देश की संसद को फुलप्रूफ किया गया है। जल्द ही इसके जरिये एसी बसों, ट्रेनों के एसी कोच और सिनेमाघरों आदि को भी वायरस से सुरक्षा देने की तैयारी है। 26 सितंबर को अपना 80वां स्थापना दिवस मना रहे सीएसआइआर के महानिदेशक डाक्टर शेखर सी मांडे ने संगठन की उपलब्धियों पर दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता अरविंद पांडेय से विस्तृत चर्चा की। पेश है इस बातचीत के अंश...

सवाल : कोरोना वायरस इस समय एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पूरी दुनिया इससे निपटने के उपाय खोजने में जुटी है। सीएसआइआर भी इस दिशा में कुछ कर रहा है क्या?

जवाब : देखिए, कोरोना वायरस से बचाव का अब तक का सबसे आसान उपाय मास्क और दो गज की दूरी ही है। इस बीच हमने अपनी प्रयोगशाला में इससे बचाव के लिए एक यूवी (अल्ट्रा वायलेट) तकनीक भी खोजी है, जिसमें कोरोना वायरस को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है। लैब में इसके सफल परीक्षण के बाद अब हम इसे विस्तार देने में जुटे है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) को इस नई यूवी तकनीक से लैस कर दिया गया है। मानसून सत्र में हमने इसे टेस्ट किया था। यह काफी किफायती है। संसद के दोनों सदनों को इस तकनीक से प्रोटेक्ट करने पर लगभग तीन लाख रुपये का खर्च आया है। जबकि एक एसी बस या ट्रेन के एसी कोच को इससे सुरक्षा देने में करीब पंद्रह हजार का ही खर्च आएगा।

सवाल : यह तकनीक कैसे काम करती है। क्या इसे आफिस और घरों में भी लगाया जा सकता है?

जवाब : इस तकनीक में एसी (एयर कंडीशनर) के साथ एक ऐसा अल्ट्रा वायलट स्कैनर लगाया जाता है, जिसमें एसी से गुजरने वाली हवा इससे स्कैन होकर निकलती है। ऐसे में इस हवा में यदि कोरोना वायरस होगा तो वह तुंरत नष्ट हो जाएगा। इस तकनीक से लैस हाल या कक्ष में यदि कोई संक्रमित व्यक्ति वहां पहुंच भी जाता है, तो उसके द्वारा संक्रमण नहीं फैल पाता। रही बात घरों में इसके इस्तेमाल की तो अब तक प्रयोग में यह घरों में उतना उपयोगी नहीं पाया गया है। इसका बेहतर उपयोग उन स्थानों पर ज्यादा हो सकता है, जहां एक साथ करीब दर्जन भर लोग मौजूद रहते हैं या फिर वहां आने जाने वाले की संख्या ज्यादा रहती है। जैसे मी¨टग हाल, आफिस आदि।

सवाल : बढ़ती चुनौतियों के साथ सीएसआइआर के विस्तार की भी कोई योजना है?

जवाब : सीएसआइआर की स्थापना 26 सितंबर 1942 में होने से लेकर अब तक इसकी 37 लैब हो गई हैं। जो देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग विषयों पर काम कर रही हैं। फिलहाल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) और डाटा साइंस के लिए अलग से लैब की जरूरत है। हम जल्द ही इसे स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।

सवाल : देश में आत्मनिर्भरता की एक बड़ी मुहिम चल रही है। सीएसआइआर इस दिशा में क्या अहम पहल कर रही है?

जवाब : हम स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े छोटे-छोटे उपकरणों से लेकर एविएशन तक के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं। एविएशन का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि हमारी बेंगलुरु स्थित लैब ने हंसा एनजी नाम से एक ट्रेनर विमान तैयार किया है। फिलहाल इसका ट्रायल पूरा हो गया है। जो काफी सफल रहा है। हम जल्द ही कुछ जरूरी औपचारिकताओं के बाद इसके औद्योगिक उत्पादन की मंजूरी दे देंगे। अभी हमें इस ट्रेनर विमान को दूसरे देशों में मंगाना पड़ता है। इस विमान से पायलटों को शुरुआती ट्रेनिंग दी जाती है। जो एयरफोर्स से लेकर एविएशन क्षेत्र से जुड़ी दूसरी कंपनियों में इस्तेमाल होता है। यह विदेश से आने वाले विमानों की तुलना में काफी बेहतर होगा। साथ ही इसकी पूरी तकनीक भी भारतीय होगी।

सवाल : शोध और इनोवेशन के साथ सीएसआइआर आम लोगों विशेषकर किसानों की जिंदगी में बदलाव के लिए क्या कुछ नई पहल कर रहा है?

जवाब : बिल्कुल। हमने जम्मू-कश्मीर में एरोमा मिशन के तहत लैवेंडर (सुगंधित पुष्प) की खेती को बढ़ावा देने की मुहिम शुरू कर रखी है। यकीन नहीं होगा, जो पुलवामा और कुपवाड़ा क्षेत्र आतंकी घटनाओं के लिए जाने जाते थे, अब वह लैवेंडर की खेती के लिए पहचाने जाने लगे हैं। वहां के लोग तेजी से इस अपना रहे हैं। उन्हें इससे पारंपरिक फसलों के मुकाबले सात से आठ गुना तक फायदा मिल रहा है। लोगों में इसके प्रति रुझान भी दिखा है।

सवाल : सीएसआइआर ने भविष्य की योजनाओं का किस तरह का खाका खींचा है? और उसकी नया क्या करने की योजना है?

जवाब : वैसे तो हम निरंतर हर क्षेत्र में कुछ न कुछ नया करते रहते हैं। फिलहाल कुपोषण के खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाने की तैयारी में है। वर्ष 2023 को हम मिलेट (बाजरा) ईयर के रूप में मनाने जा रहे हैं। जिसमें मोटे अनाजों को पोषक तत्वों से भरपूर बनाना चाहते हैं। साथ ही लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित भी करेंगे।