नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष व जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने शनिवार को अधिकारियों के साथ रोहिणी, रिठाला, कोरोनेशन पिलर स्थित सीवरेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) और तिमारपुर भलस्वा झीलों की साइट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एसटीपी से निकलने वाले सौ एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) शोधित जल का उपयोग हरित क्षेत्र की सिंचाई में करें।

उन्होंने कहा कि शहर में बढ़ती आबादी के कारण अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी। इसलिए पानी का उपयोग हमें समझदारी से करना होगा। जैन ने कहा कि शोधित जल का उपयोग पूरी क्षमता से नहीं किया जा रहा है। 20 एसटीपी से मौजूदा समय में लगभग 500 एमजीडी जल शोधित किया जा रहा है। जिसमें से केवल 90-95 एमजीडी जल का ही उपयोग किया जा रहा है।

दिल्ली जल बोर्ड का उद्देश्य है कि गैर पीने योग्य शोधित जल का पूरी तरह से उपयोग किया जाए। अधिकारी 100 एमजीडी शोधित जल का उपयोग 500 एकड़ में मौजूद वन्य क्षेत्र और हरित पट्टी की सिंचाई के लिए चरणबद्ध तरीके से सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार यमुना नदी को साफ करने तथा भूजल के गिरते स्तर को रिचार्ज करने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली जल बोर्ड ने शोधित पानी का उपयोग बागवानी के कार्यों के लिए किया। इसके साथ ही अन्य एजेंसियों को भी बसों, ट्रेनों आदि को धोने व पीने के लिए दिया गया।

बंद पड़े बायोगैस प्लांटों को तत्काल ठीक कर चालू करें

सत्येंद्र जैन ने रोहिणी में 80 एकड़, रिठाला एसटीपी 60 एकड़ वन, कोरोनेशन प्लांट पर 250 एकड़ वन क्षेत्र में शोधित जल के माध्यम से भूजल स्तर में सुधार करना तथा सीवरेज शोधन संयंत्र के पास अनुपचारित सीवरेज को गिरने से रोक लगाने के लिए भी कहा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बंद पड़े बायोगैस प्लांटों को भी तत्काल ठीक कर चालू किया जाए।

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