नई दिल्ली/नोएडा [कुंदन तिवारी]। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आइजीआइ) और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच की दूरी मौजूदा समय में 180 मिनट (तीन घंटे) से अधिक है। इस दूरी को 60 मिनट (एक घंटे) में समेटने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी का सर्वे शुरू हो चुका है। हाल ही में इसकी जिम्मेदारी यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण ने राइट्स को सौंपी है। हालांकि राइट्स की ओर से सर्वे से पहले एक ड्रॉफ्ट यमुना प्राधिकरण को सौंपा गया था। इसमें कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए गए थे, जिन पर मंथन कर अधिकारियों ने राइट्स से सर्वे रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। अब यह रिपोर्ट प्रस्तुत होने वाली है। सर्वे में यमुना प्राधिकरण ने मास्टर प्लान 2021 और 2031 के आधार पर अपनी सभी मौजूदा कनेक्टिविटी को शामिल किया है।

अधिकारियों के मुताबिक इस सर्वे में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए प्रथम स्थान पर सड़क मार्ग, दूसरे पर ट्रेन, तीसरी पर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस), मेट्रो, हवाई मार्ग, लाइट मेट्रो समेत अन्य सुविधाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत एनसीआर के तमाम जिलों को लाभ दिया जा सके। इसको लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से लेकर यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण में मंथन चल रहा है। चूंकि अभी दोनों हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए 180 मिनट से अधिक का समय लग रहा है।

बता दें कि हाल ही में दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई थी। इसमें सभी स्टेक होल्डर्स शामिल हुए, जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण, गाजियाबाद समेत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड उत्तर प्रदेश सेल के अधिकारी भी मौजूद रहे। इसमें जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सीधे आइजीआइ से जोड़ने पर चर्चा हुई और दूरी को मात्र 60 मिनट में समेटने का निर्णय हुआ। इसके बाद यमुना प्राधिकरण ने तीन प्रकार की कनेक्टिविटी पर काम शुरू किया। इसमें पहला जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आइजीआइ को जोड़ना, दूसरा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली को जोड़ना, तीसरा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पश्चिम उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों की जोड़ना शामिल है।

एससी गौड़ (कोर्डिनेटर, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड उत्तर प्रदेश सेल) के मुताबिक, एफएनजी को जल्द से जल्द अस्तित्व में लाने, यमुना के ऊपर दो पुल सेक्टर-150, 168 में बनाने के बाद रिंग रोड बनाने को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि अभी यमुना प्राधिकरण सर्वे करा रहा है। इसके बाद आगे की रणनीति पर कार्य किया जाएगा।

शैलेंद्र भाटिया (नोडल अधिकारी) का कहना है कि जीएम प्लानिंग के साथ मैं बैठक में शामिल था। मामले पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। इसके बाद राइट्स को मल्टी माडल कनेक्टिविटी सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई। रिपोर्ट आने के बाद इसको संस्तुति प्रदान कर बोर्ड में प्रस्ताव पास कर शासन के पास भेजा जाएगा।

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चार रनवे के लिए होगी स्टडी

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चार रनवे की स्टडी कराने के लिए प्रदेश सरकार ने अनुमति प्रदान कर दी है। एक सप्ताह में एजेंसी का चयन कर स्टडी का कार्य उसे सौंप दिया जाएगा। अप्रैल तक स्टडी पूरी होगी। इसके बाद प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। अगले एक साल में जेवर एयरपोर्ट के लिए तीन हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा।

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए जमीन अधिग्रहण चल रहा है। एयरपोर्ट के लिए विकासकर्ता कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी का चयन हो चुका है। 2022-23 से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान सेवा की शुरुआत हो जाएगी। शुरुआती चरण में जेवर एयरपोर्ट से सालाना एक करोड़ बीस लाख यात्रियों के हवाई सेवाओं का उपयोग करने का अनुमान है। एयरपोर्ट का अंतिम चरण पूरा होने तक सालाना सात करोड़ यात्री यहां से हवाई सेवाओं का उपयोग करेंगे।

वहीं प्रदेश सरकार ने जेवर एयरपोर्ट पर चार रनवे की स्टडी कराने की अनुमति दे दी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) स्टडी के लिए जल्द ही एजेंसी का चयन करेगी। करीब एक सप्ताह में एजेंसी का चयन कर उसे स्टडी की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। मौसम का पूर्वानुमान, एयरपोर्ट पर यात्रियों की सालाना संख्या, हवाई सेवाओं की संख्या समेत विभिन्न ¨बदुओं पर रिपोर्ट तैयार होगी। अप्रैल तक स्टडी रिपोर्ट मिलेगी।

डा. अरुणवीर सिंह (सीईओ यमुना प्राधिकरण एवं नियाल) का कहना है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चार रनवे के लिए स्टडी कराने पर प्रदेश सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्टडी कराने के लिए जल्द एजेंसी का चयन किया जाएगा। अप्रैल तक स्टडी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।

 

Posted By: JP Yadav

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