नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। कोरोना के कहर के बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute Of Medical Sciences, New Delhi) ने एक बार फिर मैराथन सर्जरी कर एक-दूसरे से जुड़ी दो साल की जुड़वां बहनों को अलग करने में कामयाबी हासिल की है। दोनों जन्म से कूल्हे व रीढ़ की हड्डी से आपस में जुड़ी हुई थीं। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के नेतृत्व में करीब आठ विभाग के डॉक्टर सहित 64 विशेषज्ञों की टीम ने साढ़े चौबीस घंटे की जटिल सर्जरी में दोनों को अलग किया।

पीडियाट्रिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. मीनू वाजपेयी ने कहा कि दोनों बच्चियां ठीक हैं। दोनों आइसीयू में हैं, उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना की महामारी के बीच इतनी लंबी सर्जरी आसान नहीं थी। एम्स के विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल से यह संभव हो सका। दोनों बच्चियां मूलरूप से उतर प्रदेश के बदायूं की रहने वाली हैं। उन्हें करीब डेढ़ साल पहले सर्जरी के लिए एम्स में भर्ती किया गया था।

एम्स की प्रवक्ता डॉ. आरती विज ने कहा कि उस समय बच्चियां शारीरिक रूप से कमजोर थीं और लंबी सर्जरी झेल पाने की स्थिति में नहीं थीं। हृदय की परेशानी थी, उनकी आंतें भी आपस में जटिल तरीके से जुड़ी हुई थीं। हृदय व रक्त वाहिकाओं (नसों) में भी विकृतियां थीं। कई बीमारियों को दूर करने के बाद एम्स ने सर्जरी का फैसला किया।

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना की महामारी के बीच सर्जरी की जरूरत को समझते हुए जल्द ऑपरेशन के लिए मंजूरी दी। ऑपरेशन के दौरान पीडियाट्रिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, कॉíडयक सर्जरी, रेडियो डायग्नोसिस, न्यूरो फिजियोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉक्टर शामिल थे। 22 मई को सुबह 8:30 सर्जरी शुरू की गई, जो 23 मई की सुबह नौ बजे पूरी हुई।

त्वचा बनाने के लिए किया गया टिश्यू एक्सपेंडर का इस्तेमाल

डॉक्टर कहते हैं कि दोनों के पैरों में रक्त संचार का रास्ता एक ही था, इसलिए रक्त वाहिकाओं को भी ठीक किया गया। इसके अलावा दोनों को एक-दूसरे से अलग करने के बाद कूल्हे के आसपास के हिस्से को स्किन ग्राफ्टिंग की जरूरत थी, इसलिए सर्जरी से पहले टिश्यू एक्सपेंडर का इस्तेमाल करते हुए त्वचा विकसित की गई। दोनों बच्चियों को अलग करने के बाद उस त्वचा की ग्राफ्टिंग की गई।

ऐसे दिया गया ऑपरेशन को अंजाम

सबसे पहले प्लास्टिक सर्जन ने त्वचा को हटाया। इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जनों की टीम ने जुडे़ हुए हिस्से को अलग किया। कॉर्डियक व थेरोसिक सर्जरी के डॉक्टरों ने रक्त वाहिकाओं को ठीक कर जोड़ा। यह सर्जरी रात करीब तीन बजे तक चली थी। उसके बाद प्लास्टिक सर्जरी इत्यादि का काम सुबह करीब नौ बजे तक चला। दोनों की उम्र को देखते हुए उन्हें एनेस्थीसिया देना भी बड़ी चुनौती थी। खास बात यह कि इन दिनों कोरोना के मद्देनजर एम्स में रूटीन सर्जरी बंद है। फिर भी दोनों बच्चियों को नया जीवन देने के लिए एम्स ने बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए ऑपरेशन किया। उल्लेखनीय है कि एम्स ने सिर से जुडे़ ओडिशा के रहने वाले जुड़वां भाइयों जग्गा व बलिया को सर्जरी कर अलग करने में कामयाबी हासिल की थी। उन दोनों को दो बार की सर्जरी में अलग किया गया था। उनकी सर्जरी भी घंटो चली थी। 

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