नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में किशोरी के पिता की हत्या मामले में दोषी उन्नाव के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सेंगर की पैरोल याचिका पर दिल्ली हाई ने अतुल सेंगर को जवाब दाखिल करने के समय दे दिया। न्यायमूर्ति विभू बाखरू की पीठ ने अतुल सेंगर से पूछा कि वह तय करे कि उसे दिल्ली के किस अस्पताल में कस्टडी पैरोल में रहते हुए इलाज कराना है। अतुल ने आठ सप्ताह की पैरोल मांगते हुए कहा कि उन्हें चिकित्सा समस्याएं हैं और कानपुर में उसकी सर्जनी होनी है।

सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) अधिवक्ता ने कहा कि अतुल प्रभावशाली है और उसे पैरोल पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा स्थिति को देखते हुए अतुल को कस्टडी पैरोल दी जानी चाहिए।

इलाज का खर्च खुद वहन करना पड़ेगा

सीबीआइ की दलील पर न्यायमूर्ति विभू बाखरू की पीठ ने अतुल के अधिवक्ता से कहा कि तय करें कि दिल्ली के किस अस्पताल में अतुल को इलाज कराना है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जो भी निजी अस्पताल तय करेगा उसे उसका खर्च खुद ही वहन करना पड़ेगा। पीठ ने कहा आप दिल्ली में अस्पताल का चुनाव करिए, हम आपको कस्टडी पैरोल देंगे। सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने यह भी सवाल उठाया कि दोषी सुनाने और सजा देने के निचली अदालत के फैसले को अतुल ने चुनौती क्यों नहीं दी है, जबकि उसने पैरोल याचिका दायर की है। इस पर अतुल के अधिवक्ता ने कहा कि वह अपील दायर करना चाहता है लेकिन अदालतों पर प्रतिबंध के कारण वह ऐसा नहीं कर सका।

13 मार्च को तीस हजारी कोर्ट ने सुनाई थी सजा

13 मार्च को तीस हजारी अदालत ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप सेंगर, अतुल और पांच अन्य लोगों को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। पीड़िता के पिता को सेंगर के दबाव में आम्र्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और कस्टडी में की गई बर्बरता के कारण पुलिस हिरासत में 9 अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई थी। सेंगर ने किशोरी का वर्ष 2017 में अपहरण और दुष्कर्म किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था और 5 अगस्त से तीस हजारी अदालत में सुनवाई हुई थी।

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