नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके के शंकर मार्केट में पुलिस और बदमाशों की मुठभेड़ हुई है।मिली जानकारी के मुताबिक, गोली की फायरिंग में दो बदमाशों इस्माइल और सलीम को गोली गली है। ये दोनों बदमाश एयरफोर्स अधिकारी से लूट की वारदात में शामिल रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ बुधवार तड़के 5.50 शंकर मार्केट में हुई मुठभेड़। कनॉट प्लेस पुलिस ने मुठभेड़ के बाद कुख्यात झपटमार इस्माइल, सलीम और साउद को गिरफ्तार किया। ये झपटमार कार से आए थे। इनका चौथा साथी भागने में कामयाब हो गया। तीनो खुख्यात झपटमार है। इनके खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

अमीर लोगों को निशाना बनाता था यह गिरोह

यह गिरोह सुबह से समय घूमने वाले अमीर लोगों को निशाना बनाता था। कुछ दिन पहले इन्होंने ही कनॉट प्लेस में सुबह के समय निशांत सिंह नाम के युवक का साइकिल छीन लिया था। निशांत भाजपा में मंत्री रहे गजेन्द्र सिंह शेखावत का भांजा है। घटना वाले दिन सुबह में वह द्वारका से साइकिलिंग करते हुए सीपी आया हुआ था। पुलिस ने इनकी कार भी जब्त कर ली है। इनके पास के हथियार और झपटे गए मोबाइल बरामद कर लिया है।

हथियार तस्कर गिरफ्तार

उधर, मंगलवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक हथियार तस्कर व अवैध हथियार खरीदने वाले को गिरफ्तार किया है। तस्कर पिछले एक साल में दिल्ली-एनसीआर के गैंगस्टरों को 70 पिस्टल दे चुका है। बिहार के मुंगेर से लाकर एक पिस्टल 35 हजार रुपये में बेचता था। पुलिस ने दोनों के पास से 7.65 बोर की पांच पिस्टल, 10 कारतूस व तस्करी में इस्तेमाल वैगनआर कार जब्त की है।

डीसीपी ज्वॉय टिर्की के मुताबिक गिरफ्तार किए तस्कर का नाम चंद्रजीत उर्फ योगेश उर्फ किशन बिहारी (31) है। अवैध हथियार खरीदने वाले का नाम आजाद महतो (27) है। चंद्रजीत को हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। वह 2007 से 2018 तक 11 साल जेल में था। क्राइम ब्रांच को 20 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि चंद्रजीत नरेला में किसी को हथियार देने आने वाला है। एसीपी अर¨वद कुमार के नेतृत्व में एसआइ आशीष कुमार, हवलदार विकास, क¨वदर, संदीप, सिपाही रंजीत, विक्रम की टीम ने राजा हरिश्चंद्र अस्पताल, नरेला के पास से वैगनआर कार में सवार चंद्रजीत को दबोच लिया। कार में रखे बैग से चार पिस्टल व 10 कारतूस मिले।

पुलिस पूछताछ में चंद्रजीत ने बताया कि वह 2006 में अपराध की दुनिया में आया था। उसने उद्योग विहार, गुरुग्राम में एक व्यक्ति को गोली मारने के बाद बिहार भाग गया था। छह माह बाद वापस दिल्ली आकर शकूरपुर में रहने लगा और वहां पैसों के विवाद में फिर एक व्यक्ति को गोली मार दी थी। वर्ष 2007 में उसने रंगदारी न देने पर सरस्वती विहार में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। वर्ष 2015 में पैरोल पर बाहर आने के बाद उसने पैरोल जंप की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके कुछ दिन बाद ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। तिहाड़ जेल में उसकी कई गैंगस्टरों से जान-पहचान हो गई थी।

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Posted By: Mangal Yadav

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