नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आकाश अस्पताल में स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इसमें दो परिवार के सदस्य शामिल थे। दोनों ही मरीज किडनी की बीमारी के आखिरी स्टेज से पीड़ित थे। असल में दोनों पीड़ित पुरुषों की पत्नियों के ब्लड ग्रुप उनसे अलग थे, लेकिन जांच के बाद सामने आया कि एक मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप दूसरे मरीज के ब्लड ग्रुप से मेल खाता है और दूसरे मरीज का ब्लड ग्रुप पहले वाले मरीज की पत्नी से मेल खाता है।

इसके बाद दोनों पत्नियों ने एक दूसरे के पति को किडनी दान कर उनको जीवनदान देने का फैसला लिया। नेफ्रोलाजी वरिष्ठ विशेषज्ञ डा. विक्रम कालरा ने बताया कि मामले में दोनों मरीज पिछले दो साल से डायलिसिस पर थे। उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट करवाने का सुझाव दिया था।

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पत्नियों ने एक दूसरे की पतियों को दी किडनी

ब्लड ग्रुप मेल नहीं खाने के कारण पत्नियां अपने-अपने पति को किडनी दान करने में असमर्थ थी। पर सरकार द्वारा स्वीकृत स्वैप किडनी ट्रांसप्लांटेशन की मदद से दोनों मरीजों की पत्नियों ने किडनी दान दी और सर्जरी को अंजाम दिया गया। स्वैप ट्रांसप्लांट से डोनर की कमी से नहीं जूझना पड़ता है जबकि अक्सर ऐसा होता है कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए डोनर नहीं मिलते हैं और परिवार के सदस्य अपने मरीज को किडनी दान नहीं कर पाते हैं।

भारत में हर साल दो लाख किडनी के मामले

भारत में हर साल किडनी की बीमारी से जूझ रहे लगभग दो लाख ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें से केवल 10,000 मरीजों में ही किडनी ट्रांसप्लांट हो पाता है। यूरोलाजी विभागाध्यक्ष डा. विकास अग्रवाल ने बताया कि हमें दोनों सर्जरी एक ही समय पर शुरू करनी थी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब सात घंटे का समय लगा।

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इसके लिए दोनों डोनर के लिए ज्यादा टीम मेंबर और बुनियादी ढांचे की जरूरत थी। मरीजों में कांप्लेक्स रीनल वैस्कुलर एनाटामी थी। इस वजह से यह प्रक्रिया और ज्यादा मुश्किल हो गई थी, लेकिन शत-प्रतिशत प्रयासों की वजह से सब कुछ अच्छे से हुआ। चारों लोग फिलहाल स्वस्थ है।

Edited By: Geetarjun