नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कृषि कानूनों के विरोध में सिंघु बार्डर पर चल रहे धरने के दौरान 29 जनवरी को प्रदर्शनकारियों की ओर से किए गए उपद्रव व पुलिसकर्मियों पर हमला के मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों को अदालत से जमानत मिल गई है। रोहिणी कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आंनद की अदालत ने उनकी अलग-अलग जमानत की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दर्ज एफआइआर से पता चलता है कि घटना में कई नामजद आरोपित हैं। पुलिस ने कईयों को मौके से पकड़ा था। पुलिस हथियार भी बरामद कर चुकी है। जबकि आरोपित नामजद नहीं हैं और आरोपितों को घटना के अगले दिन गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनकी रिमांड भी नहीं मांगी है। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाती है।

अदातल ने 50 हजार के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। जिसमें उन्हें गवाहों को धमकी नहीं देने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने व पासपोट होने पर उसे सात दिनों के अंदर जांच अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है।

इसके पूर्व कोर्ट में वकील डिंपल विवेक व परमिदंर कौर ने आरोपित करनाल निवासी अंकित व पानीपत निवासी अंकित की ओर से जमानत की अर्जी दायर की थी। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि घटना 29 जनवरी को दोपहर डेढ़ बजे हुई, जबकि पुलिस ने रात के करीब साढे 11 बजे एफआइआर दर्ज की। लेकिन पुलिस ने इसमें हुई देरी को कोई कारण नहीं बताया। दोनों आरोपित मौके पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से इसमें फंसा दिया है। दोनों आरोपित राज्य स्तर के पहलवान हैं। ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि सरकारी वकील ने उनकी दलीलों का विरोध किया।

बता दें कि 29 जनवरी को सिंघु बार्डर पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया था। जबकि एक हमलावर ने अलीपुर थाने के एसएचओ पर तलवार से हमला कर दिया था। घटना में कई पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। इस बाबत हत्या के प्रयास, सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने सहित कई धाराओं में अलीपुर थाने में मामला दर्ज किय गया था।

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप