नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। उत्तरी जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस ने कोरोना के चलते जमानत पर रिहा किए गए दो ठगों को मुंबई के अंधेरी इलाके से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपितों को तय समय में समर्पण करना था, लेकिन दोनों फरार चल रहे थे। आरोपित चिराग जायश मेहता और कल्पेश परमार ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2019 में आइपीएल में टीम दिलवाने के नाम पर एक कारोबारी से दो करोड़ रुपये की ठगी की थी।

उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि साल 2020 में चिराग और कल्पेश को जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन दोनों ने तय समय पर समर्पण नहीं किया। इसके बाद आरोपितों की तलाश शुरू की गई। पुलिस टीम को पता चला कि दोनों आरोपित चिराग और कल्पेश मुंबई के अंधेरी में छिपे हुए हैं।

अंधेरी में तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को एक अपार्टमेंट से दबोच लिया गया। दोनों वहां किराये के फ्लैट में रह रहे थे। वर्ष 2019 में आरोपितों ने आइपीएल में टीम दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से दो करोड़ से अधिक की ठगी की थी। पुलिस ने चिराग और कल्पेश समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। कोरोना के चलते दोनों जमानत पर रिहा किया गया था।

चोरी के संदेह में पीट-पीटकर हत्या

वहीं, निहाल विहार थाना क्षेत्र में चोरी का संदेह होने पर एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मृतक का नाम गगनदीप सिंह है। वे इको वैन चलाते थे। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार गगनदीप अपने बड़े भाई जसपाल के परिवार के साथ चंद्र विहार इलाके में रहते थे। जसपाल की पत्नी को किसी से पता चला कि गगनदीप को कुछ लोग पीटने के बाद सड़क पर फेंककर चले गए हैं।

उन्होंने बेसुध पड़े गगनदीप को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इंस्पेक्टर जितेंद्र के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन कर इस मामले के आरोपितों की तलाश शुरू की गई। इस दौरान पता चला कि इलाके में स्थित एक खेत में बनी झोपड़ी से मोबाइल फोन चोरी हो गया था। यहां रहने वाले मुन्ना, जलधर, शुक्कर, किशन, रमेश और कमल को गगनदीप पर चोरी का शक था। इन्होंने मिलकर गगनदीप के हाथ-पैर बांध दिए और जमकर पिटाई की और मरणासन्न हालत में बीच सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपितों को दबोच लिया।

Edited By: Prateek Kumar