नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली ही नहीं देश के नामी सफदरजंग अस्पताल में शुक्रवार को चेहरे पर चोट के कारण विकृति और बच्चों में खोपड़ी की हड्डी की जन्मजात बीमारी पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि प्लास्टिक सर्जरी के जरिये खोपड़ी की हड्डी की विकृति को ठीक किया जा सकता है। इस कार्यशाला में नर्सो व डॉक्टरों को इलाज की तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सफदरजंग अस्पताल के बर्न, प्लास्टिक व मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शलभ कुमार ने कहा कि बच्चों में खोपड़ी की हड्डी में जन्मजात बीमारी के कारण मस्तिष्क का आकार बड़ा हो जाता है। कई बच्चों के मस्तिष्क का आकार छोटा या खोपड़ी की हड्डी पीछे की तरफ निकाली होती है। इस वजह से बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित होता है। प्लास्टिक सर्जरी से इसका इलाज किया जाता है।

उन्होंने बताया कि कि कार्यशाला में डॉक्टरों को खोपड़ी की हड्डी के मॉडल पर सर्जरी की तकनीक बताई जा रही है कि वे किस तरह मस्तिष्क के आकार को सही कर सकते हैं। इस कार्यशाला में विभिन्न अस्पतालों के करीब 60 डॉक्टर हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला का मकसद यह है कि यह सुविधा दूसरे अस्पतालों में भी उपलब्ध हो सके।

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Posted By: JP Yadav

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