नई दिल्ली [राहुल सिंह]। भारत-चीन सीमा पर तनाव बरकरार है। भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर लोगों में चीन के प्रति जबरदस्त गुस्सा है। इस कारण वे चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं। लोगों के बदले इस रुख से परंपरागत दीया बनाने और बेचने वालों के घर में यह दिवाली सही मायने में खुशियां लाने वाली साबित हो सकती है। दुकानदारों के पास दीये की बड़ी मांग आने लगी है। बाजार में करीब 150 प्रकार के रंग-बिरंगे दीये उपलब्ध हैं। दरियागंज में पिछले 40 सालों से दीयों की दुकान लगाने वाली संतरा देवी कहती हैं कि साल दर साल दीयों की मांग घट रही थी, लेकिन इस वर्ष पहली बार लग रहा है कि काम अच्छा रहेगा। लोग अभी से दीयों की बु¨कग व खरीदारी कर रहे हैं। वह भी आगे दीया बनाने वाले कारीगरों को बड़ी संख्या में ऑर्डर देने लगी हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में चीन को लेकर गुस्सा है, जिसके चलते वह इस दिवाली, गोवर्धन पूजा और छठ पूजा पर दीये जलाना चाहते हैं। दीयों और मिट्टी के बर्तनों को बेचने वाले विजय कुमार ने बताया कि अभी से रोज 100 से 400 दीये तक के ऑर्डर आ रहे हैं। दिल्ली में ये दीये पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा समेत अन्य जगहों से बनकर आते हैं, जिसके बाद यहां से पूरे एनसीआर में बेचे जाते हैं।

तुलसी, ओम समेत 150 प्रकार के दीये बिखरेंगे रंग

दीया दुकानदारों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से लगातार दीयों व मिट्टी के सामान को लेकर मांग आने लगी है, जिसके चलते वह भी अपने कामगारों को दीये बनवाने का बड़ी संख्या में ऑर्डर देने लगे हैं। इस बार 150 प्रकार के रंगे-बिरंगे दीये बाजार में देखने मिलेंगे, जिनमें ओम, तुलसी, छाज, पान पत्ता, स्वास्तिक, लक्ष्मी गणेश, श्री, शंख, लक्ष्मी गणेश समेत अन्य दीये शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन दीयों की कीमत पांच रुपये से लेकर 30 रुपये तक है, जिनमें छोटे और बड़े दोनों प्रकार के दीये शामिल हैं। वहीं, केवल मिट्टी के 200 से अधिक प्रकार के दीये बाजार में मिलेंगे। बिना रंग वाले दीयों की कीमत एक रुपये से लेकर आठ रुपये तक है।

स्वेदशी सामान से होगी दिवाली

बाजार में दीये खरीदने के लिए पहुंचे सुमन शर्मा ने बताया कि इस साल वह पूरी तरह से स्वदेशी दिवाली मनाएंगी। चीन के एक भी सामान का प्रयोग नहीं करेंगी। हर साल घर के बाहर लगने वाली चीन की लाइट की जगह दीयों से घर को रोशन करेंगी। वहीं, मिट्टी के बर्तन खरीदने वाली सल्तनत खान ने बताया कि चीन की घिनौनी हरकत के चलते कोई भी नहीं चाहेगा कि उसके देश में बना सामान प्रयोग किया जाए। हर व्यक्ति को अपने देश की माटी से प्यार है। वह भी मिट्टी के बर्तन व मूर्तियों के प्रयोग से घर को सजाने के लिए बाजार आई हैं।

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