नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान 26 जनवरी को हुई हिंसा के मुख्य आरोपित ने बृहस्पतिवार को तीस हजारी अदालत में अपने बचाव में दलील पेश की। दीप सिद्धू के वकील ने कोर्ट में कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है, जिससे पता चल सके कि उसने हिंसा के लिए लोगों को भड़काया। उसने यह भी कहा कि किसान ट्रैक्टर परेड के लिए किसान नेताओं द्वारा आह्वान किया गया था। दीप सिद्धू तो किसान यूनियन का सदस्य नहीं है। दीप ने लाल किले में जाने के लिए कोई कॉल भी नहीं किया। दीप के अधिवक्ता ने दलील दी कि दीप ने दिल्ली में हिंसा का एक भी काम नहीं किया है और हिंसा भड़कने से पहले ही वह आंदोलन से अलग हो गया था।

पिछली सुनवाई पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार ने मामले में दिल्ली पुलिस से सात अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीपक डबास ने यह कहते हुए मामले को स्थानांतरित कर दिया था कि किसान रैली से संबंधित अधिकतर मामलों पर सुनवाई दूसरे न्यायाधीश ने किया है। इस पर मामले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चारू अग्रवाल को भेज दिया गया था, लेकिन लेकिन रोस्टर बदलने के कारण अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चारू अग्रवाल इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगी। इसके कारण अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलोफर आबिदा परवीन को करना था, लेकिन उनके आवकाश पर होने के कारण अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार ने सुनवाई की। दीप सिद्धू के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि चर्चित चेहरा होने के कारण उनके मुवक्किल को बली का बकरा बनाया गया है। सिद्धू ने गत मंगलवार को जमानत याचिका दायर की थी। 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान लालकिला पर हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए सिद्धू को 23 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

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